PNB Scam- "कांग्रेस के घोटाले अनंत है

देश के सबसे बड़े बैंकिंग घोटाले में मुख्‍य आरोपी के रूप में उभरकर सामने आए जानेमाने अरबपति आभूषण कारोबारी नीरव मोदी के खिलाफ एफआइआर दर्ज हो गया है। वहीं प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उनके 9 ठिकानों पर छापा मारा है। इसमें नीरव मोदी का मुंबई स्थित घर और शोरूम भी शामिल है। फिलहाल तलाशी अभियान जारी है और नीरव मोदी के हर ठिकानों पर दस्‍तावेजों को खंगाला जा रहा है। आपको बता दें कि पंजाब नेशनल बैंक ने अपने मुंबई स्थित एक शाखा में 11,346 करोड़ रुपए का घोटाला होने का खुलासा किया है, जिसके बाद से वित्त मंत्रालय और पूरे बैंकिंग क्षेत्र में हड़कंप मचा हुआ है।
ऐसे जारी हुए कंपनियों को एलओयू

अथ श्री जूता महात्मय


हिंदी में जूता, अंग्रेजी में शूज़, पंजाबी में ਸ਼ੂਜ਼ (जुत्त ), जापानी में दोसोकू, संस्कृत में पादुका ! अरे नहीं ! मैं आपको जूता के विभिन्न भाषाओँ में नाम नहीं बता रहा हूँ ! मैं तो आपका ध्यान जूते की महिमा की तरफ ले जाना चाह रहा हूँ ! इसकी महिमा अमेरिका से लेकर भारत तक कितनी फैली हुई है , यही बताने की कोशिश करी है अपने इस लेख में !

भारतीय फिल्मों के महान शोमैन राज कपूर ने जूते को समर्पित एक गाना गाकर भी इसकी महिमा को और भी बढाया है ! मेरा जूता है जापानी …..अब ये शोध का विषय हो सकता है कि उन्होंने ये जूता सच में जापान से मंगवाकर ही पहना था या मुंबई के भिवंडी बाज़ार के टिंडे वाली गली की राम स्वरुप की दूकान से तब के ज़माने में आठ आने में लेकर आये थे ! ये सवाल दिग्विजय सिंह जी के लिए छोड़ देते हैं कि वो इस पर रणधीर कपूर या ऋषि कपूर को अपनी प्रश्नावली भेजें !

नए भारत की उम्मीदों को पूरा करने वाला बजट


मोदी सरकार के वर्तमान सरकार का अन्तिमे पूर्ण बजट केंद्रीय वित्त मंत्री और कॉरपोरेट मामले के मंत्री माननीय अरुण जेटली ने देश के गांवों , किसान और गरीबों के विकास को बढ़ावा देने वाला बजट पेश किया। मौजूदा सरकार ने इस बजट के द्वारा कृषि, सामाजिक क्षेत्र, डिजिटल भुगतान, इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर तथा रोजगार सृजन को पर्याप्त बढ़ावा देने के प्रति सरकार ने अपनी प्रतिबद्धता प्रदर्शित की । संसद में बजट भाषण के दौरान दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना का ऐलान वित्तमंत्री महोदय द्वारा किया गया है। इसके तहत अब देश के 50 करोड़ लोगों को इलाज के लिए 5 लाख रुपये तक कैशलेस सुविधा दी जाएगी जो की पूर्णतया गरीब व माध्यम वर्ग के लोगो को ध्यान में रखते हुए किया गया है ।
आम बजट- 2018-19 के मुख्य अंश इस प्रकार हैं।
• 2018-19 के दौरान कुल व्यय 24.42 लाख करोड़ रुपये से अधिक होने का अनुमान
• 2018-19 के लिए बजट घाटे को जीडीपी के 3.3 प्रतिशत रहने का अनुमान
• सरकार के लिए सबसे अधिक चुनौती ग्रामीण अर्थव्यवस्था में आ रहे ठहराव को दूर करने की है
जीएसटी के बाद कर संग्रह में बढ़ोतरी हुई। टैक्स देने वालों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई

सौ में से निन्यानबे बेईमान- मेरा भारत महान”.

इस देश में अधिकांश नागरिक बेईमान प्रवृत्ति के मनुष्य हैं. यह बात और है कि कैसा और कितना मौका किसी को मिलता है बेईमानी करने का याने खुद के लिए अंगूर खट्टे हैं तो हम किसी और अंगूर खाने वाले की बुराई करने से परहेज नहीं करते. जहां जुडिशियरी से लेकर CBI, CVC , Vigilance और यहां तक क़ि CIC आदि के दामन पर भी दाग लगे हों तो भ्रष्टाचार से मुक्ति पाना असम्भव है. यहां मैं अपवादों की बात नहीं करता क्योंकि अभी भी ऐसे लोग हैं जिन्होंने ओढ़ के चुनरिया मैली नहीं की है पर ऐसे कितने होंगें, इसका अनुमान सहज ही लगाया जा सकता है.

आरक्षण की आग में झुलसता भारत

आज़ादी के समय देश में चंद वर्षों के लिए सामाजिक रूप से दबे-कुचलों को आरक्षण देने की पहल शुरू की गई थी। तब यह आदर्श व्यवस्था मानी गयी थी कि इससे समता मूलक समाज का निर्माण होगा। परन्तु संविधान निर्मात्री सभा ने सोचा भी न होगा कि लोगों में बेईमानी-लोभ इतना गहरे बैठ जायेगा कि निचली पायदान पर बैठे ज़रूरत मंदों असली पिछड़े-दलित को मौका ही नहीं मिल पाएगा और आरक्षण वोट बैंक का साधन हो कर रह गया जाएगा।
आजादी के इतने वर्षों बाद भी आरक्षण का सही फायदा जरूरतमंद लोगों तक नहीं पहुंच पाने का बड़ा कारण रहा कि आरक्षण को ईमानदारी से लागु ही नहीं किया गया। अब तो राजनीतिक वातावरण के अराजक धुंधलके में जातिगत आरक्षण नई सनसनी सांय-सांय करने को आतुर है। कुछ राजनेता अपने तुच्छ स्वार्थों के लिये युगों युगों से स्थापित सामाजिक एवं सास्कृतिक ताने बाने को नष्ट करने के लिए जातिगत आरक्षण की आड़ में समाजविरोधी ताकतों को पोषित भी कर रहे हैं। जिसकी आड़ में समाज में सबल, हर प्रकार से सक्षम जातियों ने भी आरक्षण की मांग उठाई है

कश्मीरी पंडितों का पलायन, देश के लोकतंत्र के लिए आभिशाप

यह कैसी विडम्बना है कि किसी एक पूरे जातीय समूह को अपने ही देश में शरणार्थी बनकर रहना पड़े। अपना घर-द्वार, संपत्ति, व्यवसाय आदि छोड़कर देश के अन्य भागों में शरणार्थी शिविरों में कष्टमय जीवन बिताना पड़े। रोजी-रोटी के लिए दर-दर भटकना पड़े। बच्चों की शिक्षा-दीक्षा एवं उनके जीवन के भविष्य को लेकर चिंताएँ सामने खड़ी हों। उसकी खेती-बाड़ी, मकान, दुकान सब कुछ छीन लिया गया हो। सबकुछ होते हुए भी उसके पास कुछ भी न हो। यदि ऐसी परिस्थिति में एक जातीय समुदाय विगत पच्चीस वर्षों से रहने को मजबूर हो तो उसकी मनोदशा को समझा जा सकता है। तब यह प्रश्न उठना अनिवार्य है कि क्या उसके लिए लोकतन्त्र और उसके अंतर्गत अधिकारों की रक्षा के कोई मायने हैं? निश्चित रूप से नहीं। वस्तुतः इन्हीं अधिकारों की रक्षा (पलायन पूर्व की स्थिति की बहाली) के लिए पीड़ित कश्मीरी पंडितों का समुदाय अपील, संपर्क, धरना-प्रदर्शन आदि अनेक माध्यमों से लगातार अपनी ओर ध्यान आकर्षित करने का प्रयास करता रहा है, लेकिन राज्य का सत्ता प्रतिष्ठान उसकी व्यथा को सुनने व समझने को आजतक तैयार नहीं दिखा। अतएव वे अपने ही देश में दूसरे दर्जे के नागरिक के रूप में रहने को मजबूर हैं क्योंकि वे हिन्दू हैं।

जवाबदेही, जिम्मेदारी और पारदर्शिता का ढोल पीटने वाले राजनीतिक दल


भारतीय जनता पार्टी देश में भ्रष्टाचार को चुनावी मुद्दा बनाना चाहती है लेकिन बतौर राजनीतिक पार्टी सूचना का अधिकार (आरटीआई) के दायरे में आना उसे मंजूर नहीं है। वहीं कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांघी अपनी हर सभा में सूचना का अधिकार(आरटीआई) को लाने की दुहाई देते हैं लेकिन अपनी ही कांग्रेस पार्टी को इसके दायरे से बाहर रखना चाहते हैं। राजनीतिक पार्टियों को सूचना का अधिकार(आरटीआई) के दायरे में लाने के फैसले पर कांग्रेस और भाजपा एक साथ आ गई है।देश को सूचना का अधिकार (आरटीआई) देने का दावा करने वाली कांग्रेस व अन्य सभी राजनीतिक पार्टियों ने इसके दायरे में लाने के केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के फैसले का खुलकर विरोध किया।कांग्रेस ने सीआईसी के इस फैसले को अति क्रांतिकारी करार देते हुए इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर हमला बताया। कांग्रेस महासचिव जनार्दन द्विवेदी ने कहा कि हम इससे पूरी तरह असहमत है। हमें यह स्वीकार्य नहीं है। अपने विरोध के पीछे उन्होंने दलील दी कि पार्टियां किसी कानून से नहीं बनी हैं। वे सरकारी ग्रांट पर नहीं चलती हैं। आम आदमी की जिंदगी में भी सरकारी सहायता की जरूरत होती है। उन्होंने कहा कि यह लोगों की संस्थाएं हैं, जो अपने सदस्यों के प्रति जवाबदेह हैं। उन्होंने सीआईसी पर निशाना साधते हुए कहा कि कहीं ऐसा न हो कि इस तरह की अति क्रांतिकारिता के चक्कर में हम बहुत बड़ा नुकसान कर बैठें।