मेजर ने कहा कि मैंने सिर्फ आम लोगों की सुरक्षा को देखते हुए यह कदम उठाया।

श्रीनगर। बड़गाम में आम लोगों, सुरक्षाबलों और मतदान कर्मियों को पत्थरबाजों से बचाने के लिए एक कश्मीरी पत्थरबाज को जीप के आगे बांधने वाले मेजर लीथल गोगोई ने मंगलवार को कहा कि मैंने जो किया वह सिर्फ लोगों की जान बचाने के लिए किया। वहां सिर्फ पथराव नहीं हो रहा था, भीड़ में से कुछ लोग पेट्रोल बम भी फेंक रहे थे। अगर जरा भी देर करता तो कम से कम एक दर्जन लोगों की लाशें गिरी होतीं, जिनमें पथराव करते नौजवान, सुरक्षाकर्मी, मतदानकर्मी और आम लोग भी होते।

Shiv Mishra Ji ki Kalam Se

नक़्श इलाहाबादी - (48)
अज़ीब ख़ौफ़ है छाया हुआ दरख़्तों पर
खफ़ा है फिर कोई पागल हवा दरख़्तों पर
उसी ने आज दरख़्तों के कर दिये टुकड़े
जो रोज़ फूल चढ़ाता रहा दरख़्तों पर

'लेखक कैसे बनें ?'-


Shiv Mishra Ji Se Sabhar http://devjiblog.com/topic/Hindi
       - विष्णुदत्त शुक्ल

      "साहित्य मौलिक, अनूदित, संकलित आदि कई प्रकार का होता है। उसमें मौलिक साहित्य का महत्व सर्वतोधिक होता है। प्रायः प्रत्येक लेखक यह आकांक्षा करता है कि वह जिस साहित्य का सृजन करे वह मौलिक हो। मौलिक साहित्य से ऐसे साहित्य का अभिप्राय माना जाता है जिसमें बिल्कुल नए विचारों का समावेश किया गया हो।

स्टिंग ऑपरेशन मामले में हुर्रियत ने नईम खान को निकाला, घर पर NIA का छापा

पाकिस्तान से फंडिंग के मामले में एनआईए का अलगाववादियों पर शिकंजा कस गया है। एनआईए ने जांच शुरू कर दी है। दो अलगाववादियों से इस संबंध पूछताछ हुई है। जांच एजेंसी ने अलगाववादी नईम खान के श्रीनगर में गुलबर्क स्थित आवास पर छापा भी डाला है। हालांकि छापे की अब तक पुष्टि नहीं हो पाई है।

पाक फंडिंग आतंकवादी के लिए आक्सीजन है



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कश्मीर में हिंसा के लिए अलगाववादियों और आतंकी संगठनों को पाकिस्तान की एजेंसी आईएसआई और कुछ अन्य विदेशी संस्थाओं से हवाला के जरिये हर साल 1000 करोड़ रुपये की फंडिंग होती है। अलगाववादी इस धनराशि का उपयोग पत्थरबाजों की दिहाड़ी में करते हैं। आतंकी संगठनों को हमलों के लिए फिदायीन दस्ते तैयार करने और कश्मीरी युवकों को संगठन में भर्ती करने के लिए फंडिंग हो

Kavita to dadagiri se nahi janmati (Shailendra Chauhan)

Shri Shiv Babu Mishra Ji's Facebook posts
"कविता की वर्तमान भाषा, रूप और शैली न केवल असम्प्रेष्य हो गई है, बल्कि अलेखक-पाठकों के विकर्षण का कारण भी बनी है। कविगण तो इसे मानने के लिए तैयार हैं ही नहीं, मीडिया में घुसे क्रान्तिकारी (?) लेखक और बहुत-से अन्य उनके भक्तगण (भक्ति आँख-कान मूँदकर ही होती आई है) भी अपनी यथास्थितिवादी जड़ भावना और विचार-क्षय के कारण लकीर के फकीर या कोल्हू के बैल (जो जिसको सुविधाजनक लगता होगा) ही बने रहना चाहते हैं। खासतौर से वे स्वघोषित जनवादी-क्रान्तिकारी कवि जो वास्तव में (मूलतः व्यवहार में) शुद्ध अभिजनवादी और बूर्जुआ हैं (नजदीक से देखने पर पता चलेगा), अपनी क्षुद्र महत्वाकांक्षाओं के चलते कविता के हश्र पर खुश ही हैं क्योंकि वे एक बड़े जनसमुदाय की भावनाओं, सरोकारों और मन की चिन्ता न करते हुए एक छोटे-से ग्रुप (जिसमें कई गुट हैं) के बतौर अपनी अस्तित्व-रक्षा के लिए संघर्षरत हैं। उनकी बेहद मनोरंजक प्रतियोगिता कलावादियों के साथ होती रहती है, जिन्हें अक्सर ये प्रतिक्रियावादी वगैरह कहते हैं और अवसर आने पर कलावार्ता, पूर्वग्रह, समास, बहुवचन, कलाप्रयोजन या उनकी अन्य सहोदरा पत्रिकाओं में सहयोग भी करते हैं, तथा कलावादियों द्वारा आयोजित समारोहों, पर्वों, गोष्ठियों में जाने के लिए न केवल बेताब रहते हैं बल्कि कलावादियों की स्तुति में भजन गाते पाए जाते हैं। इनका यह प्रैगमेटिक एप्रोच उनकी हिप्पोक्रेसी का परिचायक है। विगत दिनों दिल्ली से निकलने वाली एक पत्रिका 'हंस' में 'न लिखने के कारण' पर एक प्रायोजित बहस चलवाई गई (इस पत्रिका में अक्सर ही बहुत कुछ प्रायोजित किस्म के बहस-मुबाहसे चलते रहते हैं) तब कहानीकार 'सृंजय' ने जो अपनी टिप्पणी की, वह और भी मजेदार थी। उनका कहना है कि " आजकल धड़ल्ले से और जिस मिकदार में लेखन हो रहा है, अगर हम उसे आत्ममुग्ध लेखन न कहें तो भी उसमें गहरे दायित्वबोध का अभाव तो जरूर है। बस लिखे जा रहे हैं। हम शायद भूल बैठे हैं कि लेखन एक सचेत सामाजिक कर्म है। यह बात उन्होंने लेखकीय विकर्षण के सम्बन्ध में कही है जिसे वह एक समाजशास्त्रीय विषय मानते हैं। खासतौर से नई पीढ़ी का लेखकीय विकर्षण उनकी चिन्ता का विषय है। अब यहाँ एक बात बहुत विचित्र है कि इस 'लेखन से विरक्ति' और 'लेखकीय विकर्षण' का मतलब क्या है ? एक ओर कहा जा रहा है कि आज धड़ल्ले से धुआँधार लेखन हो रहा है। दूसरी तरफ नई पीढ़ी में लेखन से विरक्ति और लेखकीय विकर्षण की बात की जा रही है। ये दोनों विरोधाभासी बातें हैं। संभवतः लेखक का तात्पर्य लेखकीय नहीं, पाठकीय विकर्षण से है, क्योंकि बीच में उन्होंने यह चिन्ता भी जाहिर की है कि "हमने कभी आत्मावलोकन नहीं किया कि हम जो लिख रहे हैं वह पाठकों तक जा रहा है या नहीं। उसकी प्रतिक्रिया क्या और कैसी हो रही है। हमारे पाठकों की हमसे क्या अपेक्षा है और हम उनकी वह अपेक्षा पूरी कर रहे हैं या नहीं।" परन्तु यह सब कहने के बाद पुनः लेखक, लेखक बनने की प्रक्रिया और पाठक बनने की प्रक्रिया की बात करने लगता है। वह समाज में हुए तकनीकी परिवर्तनों की बात करता है, शिक्षा क्षेत्र के परिवर्तनों की बात करता है, नई पीढ़ी की धैर्यहीनता की बात करता है, नई पीढ़ी के स्वप्नजीवी होने और कल्पनाहीन होने की बात करता है, वह फिल्मी गीतों की गेयता और कंठग्राह्यता की बात करता है और विगत दो दशकों की नामी कविताओं की प्रभावहीनता की बात करके एक महत्वपूर्ण बात कह जाता है कि "कुचलकर आगे बढ़ जाने की मनोवृत्ति में संवेदना मर जाती है, और संवेदनहीनता से साहित्यिक अनुराग की आशा करना व्यर्थ है"।"
" ऐसी कविताओं ( सर्वश्री कुँवर नारायण, केदारनाथ सिंह, राजेश जोशी एवं विनोदकुमार शुक्ल की कविताएं) पर श्रद्धा रखने वाले अंधभक्तो की हिन्दी साहित्य में कोई कमी नहीं है। (संख्या में नहीं, सिर्फ मुहावरे के तौर पर) बहुत ढोलची हैं, बहुत नगाड़ची, इनमें कुछ 'राष्ट्रभक्त' हैं तो कुछ 'जनवादी'। फिर सरकारी ख़ादिम तो हैं ही। इन सबकी फ्रीज की हुई स्टैण्डर्ड सूचियाँ हैं। सहयोग के आधार पर इनमें 'एक्सचेंज' चलता रहता है। तू मुझे, मैं तुझे वाला लेन-देन। पर कविता तथा कवि वही होंगे जिन्हें ये साहित्यिक माफिया गुट मान्यता देंगे। आप देखेंगे जैसा कि इस देश की बूर्ज्वा और फ़ासिस्ट राजनीति में सत्ता के स्वाद के लिए अधिकतर पार्टियाँ एक दूसरे को मान्यता दिए रहती हैं। वे चाहे कितना चिल्लाएँ कि अमुक साम्प्रदायिक है, अमुक विदेशी है, फलाँ चोर है, फलाँ डकैत पर कोई किसी का खात्मा नहीं चाहता। अंदर से वे सब एक ही थैली के चट्टे-बट्टे होते हैं।यूँ ऊपर से वे प्रतिद्वंद्वी भी हैं, प्रतियोगी भी पर सही मायने में कुछ नहीं हैं। आपको कविता की सभी पत्रिकाओं में सम या विषम भाव से एक साथ छपे मिलेंगे, जैसा कि पहले 'उद्भावना' के कविता अंक का जिक्र किया जा चुका है। इसमें प्रारम्भ ही कुँवर नारायण, अशोक वाजपेयी, लीलाधर जगूड़ी और विष्णु खरे से होता है। फिर मलय, प्रयाग शुक्ल, प्रभात त्रिपाठी, वेणुगोपाल जैसे कवि हैं तो बाद में आलोक धन्वा, ज्ञानेन्द्रपति, मंगलेश डबराल, राजेश जोशी, उदयप्रकाश, अरुण कमल और नरेन्द्र जैन हैं। कवि बहुत से हैं पर प्रीमियर लिस्ट में और चार-छह नाम यदि जोड़ दिए जाएँ तो आज की प्रतिनिधि (?) हिन्दी कविता यहीं शेष हो जाती है ? आगे आप देवी प्रसाद मिश्र, कुमार अंबुज, बदरी नारायण तथा एकान्त श्रीवास्तव को और ले लीजिए। बस यह एक परिपूर्ण बिरादरी बन जाती है।

फिर कवि-रूप में न सही तो केदारनाथ सिंह परिचर्चा में वरिष्ठता-क्रम में शामिल हो गए हैं। तमाम सरकारी, जनवादी, प्रगतिशील और गैर-प्रगतिशील पत्रिकाएँ इन्हीं लोगों की कविताओं से और उनकी कविताओं की प्रशंसा में या चर्चा में हजारों पृष्ठ काले किए रहती हैं, पर दुर्भाग्य कि हिन्दी वाले किसी संवेदनशील नागरिक ने (लेखक ने नहीं) आज तक इनमें किसी की भी कविता की एक भी पंक्ति नहीं बताई। मैं हिंदीभाषी क्षेत्र के हर कोने में घूमा हूँ, लाखों मध्यवर्गीय और निम्न-,मध्यवर्गीय लोगों से मिला हूँ पर हिन्दी कविता का जिक्र चलने पर बेहद मीठी और अजानी कविताएँ मेरे कानों में पड़ी हैं-गीतों, गजलों के अनेक टुकड़े। पर इन स्वनामधन्य, स्वपोषित महान कवि सूरमाओं के नाम तक लोग नहीं जानते। अब यहाँ प्रश्न उठेगा कि तब कवि के रूप में लोग किसे जानते हैं? फिल्मी गीतकारों को, मंचीय भाँड़ कवियों को या स्थानीय उन कवियों को जिनके सान्निध्य में वे दिन-रात रहते हैं। सच यही है कि लोग इन्हें ही जानते हैं, अलबत्ता उर्दू शायरों में इक़बाल, मीर, ग़ालिब से लेकर साहिर, शकील, मज़रूह, कैफ़ी और निदा फ़ाजली को लोग जानते हैं। वहीं हिन्दी के उन शैलेन्द्र को कोई नहीं जानता जिन्होंने फिल्मों के पहले सैकड़ों अच्छी कविताएँ लिखीं और फिल्मों में लोकतत्वों से भरपूर हजारों मधुर गीत भी लिखे। हाँ, लोग उन्हें नाम से भले नहीं जानते पर उनके गीत जरूर गाते हैं।"... क्रमशः
  
पाक ने भारतीय बैंकिंग सिस्टम पर किया बड़ा साइबर हमला, बरतें ये सावधानियां

सर्जिकल स्ट्राइक के बाद पाकिस्तान के हैकरों ने भारत की बैंकिंग इंडस्ट्री पर अब तक का सबसे बड़ा साइबर हमला किया है। बताया जा रहा है कि करीब 30 लाख से ज्यादा बैंकों के डेबिट कार्ड की डिटेल को पाकिस्तानी हैकरों ने चुरा लिया है और अब साइबर क्राइम के जरिए उन अकाउंट में सेंधमारी की जा रही है।
पेमेंट काउंसिल ऑफ इंडिया ने भारतीय बैंकों के सर्वर और सिस्टम की फॉरेंसिक ऑडिट कराने का आदेश दे दिया है ताकि इस फ्राड का पता लगाया जा सके।
इससे पहले 7 अक्टूबर को सीआरईटी ने चेतावनी जारी करते हुए कहा था कि सर्जिकल स्ट्राइक के बाद पाकिस्तान की तरफ से भारत पर साइबर हमला हो सकता है। इसके बाद से ही ऑनलाइन फ्राड के शिकायतें सामने आने लगी। भारतीय बैंकिंग इंडस्ट्री पर हुए इस सबसे बड़े साइबर हमले से बैंकिंग इंडस्ट्री बुरी तरह घबराई हुई है। इतनी बड़ी तादाद में कभी भी बैंकिंग का डाटा चोरी नहीं हुआ था। बैंक को निर्देश दिया गया है कि वो प्रभावित खाता धारकों को मुआवजा दे।
सूत्रों के मुताबिक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, आईसीआईसीआई बैंक, एक्सिस बैंक और येस बैंक को अपने ग्राहकों और दूसरे बैंकों को मुआवजा देना होगा।
अंग्रेजी अखबार की खबर के मुताबिक नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के मुताबिक करीब 90 एटीएम के साथ छेड़छाछ की गई जिससे 19 बैंकों के करीब 641 ग्राहकों को नुकसान पहुंचा है। एनपीसीएल की रिपोर्ट के मुताबिक इस दौरान हैकिंग के जरिए 1.3 करोड़ रूपये की चोरी की गई है।
ऑनलाइन फ्राड से बचने के लिए तुरंत करें ये उपाय

ऑनलाइन फ्राड से बचने के लिए कुछ जरूरी सावधानियों को बरतने की जरूरत है जिससे आप ऑनलाइन फ्राड से बच सकते हैं। सबसे पहले ये सुनिश्चित कर लें कि आप जब भी एटीएम से पैसे निकालें तो ये उसी बैंक का एटीएम हो जिसमें आपका खाता है। दूसरा एटीएम से पैसे निकालने के बाद जो स्लिप आपको मिलती है उसे वहीं लापरवाही से ना फेंक दे। आपकी ये छोटी से गलती आपको भारी नुकसान पहुंचा सकती है। साइबर कैफे या किसी सार्वजनिक सिस्टम से बैंकिंग ट्रांजेक्शन ना करें।

जल्द से जल्द अपने एटीएम का पासवर्ड बदल दें साथ ही नेट बैंकिंग का भी पासवर्ड बदल दें और ये पासवर्ड कभी किसी के साथ साझा ना करें और ना ही इन्हें अपने मोबाइल में डालकर रखें। हो सके तो बैंक से कहकर अपना एटीएम कार्ड भी बदलवा लें।
इटर्नल ब्लू: भारत समेत दुनियाभर के 100 देशों पर बड़ा साइबर हमला, भारत सरकार ने संवेदनशील संस्थानों को किया अलर्ट


भारत समेत दुनियाभर के करीब 100 देशों पर बड़ा साइबर हमला हुआ है। इस हमले से पिछले 24 घंटों के दौरान सवा लाख से ज्यादा कंप्यूटर प्रभावित हुए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह हमला अमेरिकी सुरक्षा एजेंसी (एनएसए) से चुराए हुए साइबर हथियार ‘इटर्नल ब्लू’ से किया गया है। इसे ‘वान्नाक्राइ रैनसमवेयर’ के नाम से भी जाना जाता है। इस हमले के मद्देनजर भारत सरकार की इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम (सीईआरटी) ने रिजर्व बैंक, शेयर बाजार और राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआइ) जैसे संवेदनशील संस्थानों को अलर्ट जारी किया है। इसमें इस बात का विस्तार से उल्लेख है कि उन्हें क्या करना है और क्या नहीं करना है।
खबरों के मुताबिक, इस साइबर हमले के बारे में सबसे पहले स्वीडन, ब्रिटेन और फ्रांस में पता चला। इसके बाद इसका दायरा बढ़ता चला गया। ‘कैस्परस्काई’ लैब में कार्यरत सिक्योरिटी रिसर्चर्स ने ब्रिटेन, रूस, यूक्रेन, भारत, चीन, इटली और मिस्न समेत सौ देशों में साइबर हमलों को रिकॉर्ड किया। इन हमलों से सबसे ज्यादा ब्रिटेन प्रभावित हुआ, जहां अस्पतालों और क्लीनिकों के फोन और कंप्यूटरों ने काम करना बंद कर दिया। लिहाजा अस्पतालों को मरीजों से वापस जाने का अनुरोध करना पड़ा। इसके अलावा वैश्विक कंपनी ‘शिपर फेडेक्स’ समेत कई कंपनियां भी इस हमले से खासी प्रभावित हुई हैं। रूस में भी कई बैंकों और मंत्रलयों के कंप्यूटर इस हमले का शिकार बने हैं। सिक्योरिटी सॉफ्टवेयर कंपनी ‘सिमेंटेक’ में रिसर्च मैनेजर विक्रम ठाकुर ने बताया कि अमेरिकी मुख्यालय वाले कुछ ही संगठन इस साइबर हमले से प्रभावित हुए हैं क्योंकि हैकर्स ने संभवत: अपना अभियान यूरोपीय संगठनों को निशाना बनाने से शुरू किया।
एशियाई देशों में भी इसका ज्यादा प्रभाव नहीं दिखा है, लेकिन इन देशों के अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि नुकसान कितना हुआ है। भारत में आंध्र प्रदेश पुलिस के कुछ कंप्यूटर ही इस साइबर हमले की जद में आए हैं। अधिकारियों ने बताया कि चित्तूर, कृष्णा, गुंटूर, विशाखापट्टनम और श्रीकाकुलम जिलों की 18 पुलिस इकाइयां प्रभावित हुई हैं। लेकिन इससे दैनिक कामकाज प्रभावित नहीं हुआ। एक अन्य अधिकारी ने बताया कि वे केंद्रीय गृह मंत्रलय के साथ संपर्क में हैं और डेटा सुरक्षित रखने के सभी एहतियाती उपाय कर रहे हैं। उधर, चीन की सरकारी समाचार एजेंसी ने माध्यमिक विद्यालयों और विश्वविद्यालयों के प्रभावित होने की सूचना दी है, लेकिन उसने उनकी संख्या नहीं बताई।
जुटे हैं विशेषज्ञ: संक्रमण से प्रभावित कंप्यूटरों के जरिये हैकर डिजिटल करेंसी ‘बिटक्वाइन’ में 300 से 600 अमेरिकी डॉलर की मांग कर रहे हैं। अमेरिका के आंतरिक सुरक्षा विभाग के तहत आने वाली कंप्यूटर इमरजेंसी रेडीनेस टीम (यूएससीईआरटी) ने बताया कि उसे कई देशों से ‘वान्नाक्राइ रैनसमवेयर’ संक्रमण की शिकायतें मिली हैं। यूरोपीय यूनियन की एजेंसी ‘यूरोपोल’ ने कहा कि हमले के साजिशकर्ताओं की पहचान करने के लिए अंतरराष्ट्रीय जांच किए जाने की जरूरत है। वहीं, माइक्रोसॉफ्ट की प्रवक्ता ने बताया कि कंपनी स्थिति से निपटने के उपायों पर काम कर रही है।

शैडो ब्रोकर्स’ का कारनामा: इस साइबर हमले की जिम्मेदारी लेने के लिए अभी तक कोई सामने नहीं आया है, लेकिन माना जा रहा है कि इसे ‘शैडो ब्रोकर्स’ नामक ग्रुप ने अंजाम दिया है। ग्रुप ने 14 अप्रैल को ही इस मालवेयर की जानकारी ऑनलाइन कर दी थी। यह वही ग्रुप है जिसने पिछले साल दावा किया था कि उसने एनएसए का साइबर हथियार ‘इटर्नल ब्लू’ चुरा लिया है। उस वक्त लोगों ने उनके इस दावे पर संदेह व्यक्त करते हुए कहा था कि ग्रुप शायद अपने हैकिंग स्तर को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा है। ‘इटर्नल ब्लू’ को एनएसए ने आतंकियों और दुश्मनों की ओर से इस्तेमाल किए जाने वाले कंप्यूटरों में सेंध लगाने के लिए विकसित किया था।

PM Narendra Modi has become a hero

The long-running Baloch movement chief, Nawali Qadri says that the PM Narendra Modi has become a hero after August 15's  Bhasad of the Prime Minister of India, given the Red Fort, gave the world a sense of freedom in Balochistan by mentioning Balochistan on Independence Day. The contribution he has given to Baluchistan is a big deal for the people there. 
On Sunday, Prime Minister Narendra Modi's parliamentary constituency, Varanasi, Nayal Qadri highly appreciated his contribution. On the second day of the Culture Parliament in Varanasi, Naudi Qadri said that if the Indian government allowed it, the exiled government of Balochistan would be formed in Varanasi only. India's Prime Minister Narendra Modi is the hero of Balochistan.
We give Bloch a hundred years of life in lieu of a bowl of water. If Balochistan is free, then there will be the first statue of Narendra Bhai. We have saved our lives so far, to the temple of Mother Hinglaj Maharani. You save us, ask.
For the first time in seventy years, someone in India has talked about the freedom of Balochistan and talked about the atrocities being done by Pakistan. Thank you Kashi and Indian people for the sake of saying that you have elected MPs and sent them to the Parliament and also said that in the India, Muslim safe and free without any fear.
In a two-day Culture Parliament held in Varanasi, President of the World Baloch Women's Association, Nayyal Qadri, wants to end the Baloch breed in Balochistan with Pakistan, China. Pakistan is massacring Baloch people. He said that if the Government of India gives permission, the exiled government of Balochistan will be constituted in Varanasi only. While complimenting Narendra Modi for raising the issue of Baloch freedom, Naail said that if Balochistan is free, then the image of Prime Minister Narendra Modi will be found there.
He said, "Balochistan is fighting for its independence. Modiji has praised it with the curiosity and gambling. No leader of the world raised our voices. In 70 years Pakistan is oppressing us. Modiji is our hero. Modiji is our brother. "He said," We give Biloch a cup of lust for a hundred years in lieu of water. We have saved the temple of Mother Hinglaj so far. Nayla clarified that if India remains together to liberate Balochistan, then it will have far-reaching advantages. One, India will fulfill the tradition of helping the people according to their culture; in the next coming time, the help of Balochistan energy will be helpful. India will get the direct route from Central Asia to Azad Balochistan. No Indian will need to take a visa for Hinglaz Mata's visit. The leader of the attack said that Pakistan is the biggest enemy of Islam. While terrorizing the name of Islam, so far 30 lakh Bengali Muslims, 40 lakh Afghan Muslims and more than two lakh Balochs have been killed. Significantly, Prime Minister Narendra Modi mentioned Balochistan in the August 15 speech. After this, demand for Baloch independence has increased. In many countries, there are demonstrations against Pakistan. 
Army chief General Bipin Rawat said on Thursday that India needs to spend much more on military modernization to ensure its economic growth continues unhindered, while announcing that his force has prepared a national security strategy and a military strategic policy to deal with emerging security challenges.

Criticising these lack of strategic culture in the country and "the general thinking" that expenditure on defense is "a burden", he said, "While we are developing our economy, the military is not getting its due share. I think here we need to draw a lesson from China."


Speaking at a function at the United Service Institution, General Rawat said India must build stronger ties with countries like Iran, Iraq and Afghanistan to create "a two-front scenario" for Pakistan, while actively pursuing the "Act East" policy to encircle the other neighbors. He said the time has come for India to have a say in all major issues at the UN.
"सृजनबिंदु से रूप-रचना प्रक्रिया की ओर आने पर साहित्य का सर्वाधिक प्रमुख स्वरूप निर्देशक तत्व 'कल्पना का संदर्भ' सिद्ध होता है। एक भी कलाकृति ऐसी नहीं होती जो यथार्थ की हूबहू प्रतिकृति हो। 'गोदान' को हम सब यथार्थवादी उपन्यास कहते हैं, पर ठीक 'होरी' जैसा एक भी किसान सारे भारतवर्ष में नहीं निकल सकता। इस कथन के बावजूद हम यह भी कहना चाहेंगे कि 'होरी' ही भारतीय किसान का वास्तविक प्रतिनिधि है। पर यह विरोधाभास नहीं है, कल्पना शक्ति का चमत्कार है। विभिन्न किसानों में उपस्थित गुणों-अवगुणों, कमजोरियों एवं शक्तियों को लेखक ने अपनी कल्पना से एक स्थान पर एकत्र कर दिया है और यह पात्र अपने आप में स्वतंत्र व्यक्तित्व भी है और प्रतिनिधि पात्र (टाइप कैरेक्टर) भी। इस कृति में लेखक ने यथार्थ की बिखरी वस्तुओं, परिस्थितियों या घटनाओं का ही नया संयोजन किया है। यों लेखक अपनी श्रेष्ठ कलात्मक सृजन स्थिति में प्रकृति या यथार्थ के विरुद्ध भी जा सकता है।....
साहित्य या कला में रूप, शिल्प, फार्म या सांचा (फ्रेम एंड पैटर्न) अवश्य होता है। अन्य लेखनप्रकारों (शास्त्र व विज्ञान आदि) में इस बात का महत्व नहीं कि उन्हें कैसे लिखा गया है।...परंतु साहित्यिक कृति में उसके रूपाकार का महत्व अधिक होता है।...भावजगत की वस्तु को आकार देने का प्रयास, ऐसा आकार देने का प्रयास, जिससे कि वह भाव अधिक से अधिक संप्रेष्य बन सके, कलाकार का लक्ष्य होता है। इसके लिए वह भाषा, छंद, अप्रस्तुतिविधान, रूप योजना आदि की संभावनाओं का अधिक से अधिक उपयोग करता है। अनेक चरित्रों, बिंबों, प्रतीकों, घटनाओं, कलावस्तु के मोड़ों, संवाद की वक्रताओं आदि की खोज और प्रयोग करता है। रूप और माध्यम इस दृष्टि से भी महत्वपूर्ण होते हैं कि उनके द्वारा हम साहित्य की भी अनेक विधाओं को पहचानते और उनका वर्गीकरण करते हैं। गद्य, पद्य, कहानी, उपन्यास और नाटक के विभाजन रूपाकार और माध्यम के ही हैं। यों मूल रूप से ये कलाकृतियां साहित्यिक रचनाएं हैं।...
कोई भी साहित्यिक कृति केवल ऊपरी सतह पर से नहीं जानी जा सकती। वह बहुस्तरीय ही नहीं होती, बल्कि उसका अत्यंत जटिल स्तरविधान होता है। जो कृति जितने ही जटिल स्तरों पर आधृत होती है, वह उतने ही अधिक व्यक्तियों एवं युगों में प्रिय होती है। अतः साहित्यिक अध्ययन का प्रारम्भ कृति के इन विविध स्तरों के विश्लेषण द्वारा होना चाहिए। ये स्तर रूप और शिल्प के भी होते हैं और उसको अभिव्यक्त करने वाली जीवनानुभूति और जगत के दृश्यमान रूप की छवियों के भी।.. क्रमशः
नक़्श इलाहाबादी - (36)
इंसान तू अब अपना किरदार बदल
मत डाल जहान के तू ख़्वाबों में ख़लल
हो जाए वीरान न ये गुलशन सोच
मिटने को है तेरी पहचान सँभल
ऐ दोस्त यहीं कहीं कोई रहता है
वो बन के हवा मुझमें ही बहता है
मुझको ही सुनने का सलीका न रहा
मुझसे तो बारहा वो कुछ कहता है
पत्तों को ताज़गी गुलों को भी निखार
अनमोल ये रहमतों की दे दे के फुवार
हैरत है एक पल में ये कौन यहाँ
करता है हर सम्त ख़िजाँ को भी बहार
हर सम्त ये ख़्वाहिशों के बढ़ते तूफ़ान
लुटती हुई अस्मतें ये बिकते ईमान
इन घोर गुनाहों की दलदल में हैफ़
सदियों से घुट-घुट के मरते इंसान
दोस्तों नक्श इलाहाबादी की ये ग़ज़ल आज दौर में कितनी प्रांसंगिक है