अगर मोदी नहीं, तो विकल्प में कौन है हमारे पास?


ऐसे लोग बहुत ज्यादा हैं, जो मोदी को और उनकी नीतियों को इस देश, समाज के लिए जरूरी मानते हैं। इन सबको मोदी मुबारक। मगर ऐसे लोग भी कम नहीं, जो इसी देश और समाज के लिए मोदी तथा उनकी नीतियों को बेहद खतरनाक मानते हैं। ये लोग बाकी देशवासियों को यह समझाने की कोशिश करते रहे हैं कि क्यों मोदी की नीतियां हानिकारक हैं, पर नाकाम होते रहे हैं। जहां कहीं, जिस किसी भी चुनाव में मोदी मुद्दा बनते हैं ऐसे तमाम लोग इस कोशिश में लगते हैं कि मोदी की जीत न हो। एकाध मौकों पर इनकी कोशिशें सफल भी हुई हैं, लेकिन ज्यादातर मौकों पर इन्हें मुंह की खानी पड़ी है। मोदी पहले से ज्यादा बड़े विजेता बन कर उभरे हैं। अपने देशहित नीतियों व कार्यो के दम पर
दिलचस्प बात यह है कि जहां ऐसे लोग मोदी को हराने में या कहा जाए मोदी विरोधी ताकतों को जिताने में कामयाब रहे, वहां भी नतीजे कुछ खास बेहतर नहीं हुए हैं। दिल्ली में आम आदमी
पार्टी ने कुछ लोकप्रिय और जनकल्याणकारी कदम उठाने का दावा करते जरुर हैं, मगर घोटालो आपराधिक कार्यो के कारणों से वे सदा आलोचना के पात्र ही होते है व दिल्ली की जनता के लिए बोझ हो चुके है, यह कहना मुश्किल है कि वे टिकाऊ साबित होंगे या नहीं। चूंकि ये कदम वैकल्पिक अर्थनीति के बुनियादी तर्क पर आधारित नहीं हैं, इसलिए उनका स्वरूप सब्सिडी जैसा ही है। सो, वे कब तक रहेंगे और जब तक रहेंगे तब तक प्रदेश की आर्थिक सेहत पर कितना और कैसा असर डाल चुके होंगे, कहना मुश्किल है। दूसरी और ज्यादा महत्वपूर्ण बात यह है कि केजरीवाल कहने को भले मोदी के विरोधी हों, लेकिन वह भी किसी तरह की वैकल्पिक राजनीति की बुनियाद नहीं रख पा रहे, दुसरे उनके खुद के घोटाले व उनके विधायको के कारनामे उन्हें ख़त्म करने की पुरजोर कोशिश में लगे रहते है, कुछ हद तक वे कामयाब भी हो रहे है|
उनकी पार्टी के अंदर भी लोकतंत्र नहीं है। वह भी अपनी सारी ताकत चुनावों में झोंक देते हैं। पंजाब और गुजरात के विधानसभा चुनावों में स्थानीय नेतृत्व को पनपने और बढ़ने का मौका देने के बजाय खुद केजरीवाल अपने सारे कैबिनेट सहयोगियों के साथ भिड़े हुए थे। ठीक मोदी की ही तरह। अगर जीतते तो केजरीवाल को पूरा श्रेय मिलता, पर प्रदेश में कोई ऐसा नेता नहीं पनपता जिसे जनता अपना नेता मान पाती। वह केजरीवाल को ही नेता मानने को अभिशप्त होती। यानी वहां जिसे भी मुख्यमंत्री बनाया जाता, वह केजरीवाल की कठपुतली होने को मजबूर होता। जो केजरीवाल का विरोध करते है वो निकल दिए जाते है जो पुनः इन्ही की जड़ें खोदने में जुट जाते है जैसे कपिल मिश्रा, बिन्नी जैसे उनके सहयोगी |
तो कहां है वैकल्पिक राजनीति?
बिहार में लालू और नीतीश के गठबंधन ने मोदी की अगुवाई वाली बीजेपी को चुनाव में हरा दिया, पर बिहार में क्या अलग तरह की राजनीति मजबूत हुई? लालू के अनपढ़ पुत्रो व लालू यादव के घोटालो व अनावश्यक दखलंदाजी से परेशां व अज़ीज़ आकर अंत में हारकर नितीश को गठबंधन तोड़ना ही पड़ा|
कांग्रेस की बात करना तो बेमानी है, जिसकी बागडोर राहुल, जैसे व्यक्ति के हाथ में है जो आलू की फैक्ट्री लगवा सकते है, नारियल का जुस निकल सकते है, न जाने क्यों मुझे लगता है के कांग्रेस मोदी विरोध में देश विरोधी नीतियों पर चल पड़ा है, मणिशंकर अय्यर का पाकिस्तान से मदद मांगना मोदी को हराने के लिए, राहुल का मौजूदा हालातो में चीनी दूतावास में छुप –छुपाकर मुलाकात करना, जे एन यु यूनिवर्सिटी में देशविरोधी छात्रो के साथ खड़ा होना आदि न जाने ही उदारण है, वस्तुतः मोदी का सामने आज जो भी चुनौतिया है वो कांग्रेस की ही देन है आप स्वयं जानते है, आखिर कांग्रेस के शाशनकल में आपने घोटालो के सिवाय क्या कुछ और सुना है?
यूपी में अगर कांग्रेस और अखिलेश की जोड़ी जीत भी जाती, तो गायत्री प्रजापति जैसे गैंगरेप आरोपी मंत्री को बचने का एक और मौका मिलने के अलावा क्या हो जाता? उनके जातिवाद व सम्प्रदायवाद की तुष्टीकरण की राजनीती कर कुछ और घोटाला करने का मौका और मिल जाता है न? यादव परिवार में देर-सबेर मेल-मिलाप होना ही था। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने अपनी नीतियों में बुनियादी अंतर दिखाने वाला कौन सा वादा किया था? यदि कोई विकासपरक कार्य किया हो तो आप ही बताओ ?
साफ है कि मोदी के विरोधियों को जरा ढंग से सोचने की जरूरत है। मोदी की नीतियों की जो भी गड़बड़ियां हैं, उनके फैसलों के जो भी खतरें हैं उनसे लोगों को अवगत कराने की मुहिम तो खैर जारी रखनी ही होगी, रखनी ही चाहिए। पर विरोध का यह तरीका नाकाफी है कि खुद को मोदी विरोधी बताने वाले सभी लोगों को साथ लाकर मोदी का विकल्प घोषित कर दिया जाए। मोदी के विरोध में कही देश विरोधी न बन जाये, क्योकि इस वक्त विपक्ष के कार्यो से यही लग रहा है, आप बताइए, आप क्या विचार है? विकल्प घोषित होना जरूरी नहीं, विकल्प का बेहतर होना जरूरी है। खुद को मोदी का विकल्प मानने वालों या बताने वालों की यह जिम्म्दारी है कि वे खुद को मोदी से बेहतर साबित करें, यानी मोदी की राजनीति से बेहतर राजनीति पेश करें, मोदी के विजन से बेहतर विजन पेश करें। खास समुदायों को नीचा मानने वाली और उनसे नफरत की सीख देने वाली सोच के बरक्स सबको समान और अपना मानने वाली दृष्टि का औचित्य अपने आचरण से साबित करना होगा। मोदी के देशहित नीतियों के समान ही देशहित के ही लिए मोदी का विरोध होना चाहिए न कि किसी एक परिवार हित, दलहित व वोटहित के लिए मोदी का विरोध ना आप को अच्छी लगेगी ना ही देश की आप जैसे जागरूक मतदाता को, आप बताइए ये आप को अच्छा लगेगा?

यह थका देने वाला श्रमसाध्य और समयसाध्य काम है। इसके लिए आपकी सोच व दिल में देशप्रेम होना चाहिए | मगर इसकी शुरुआत कहीं न कहीं तो दिखनी चाहिए। ऐसे लोग भले कम हों, उनका प्रभाव कम हो, उनके साथ लोग कम हों पर असली विकल्प वही लोग हो सकते हैं। अगर ऐसे लोग कहीं दिख रहे हों, तो उनका साथ देकर और नहीं दिख रहे हों तो खुद वैसा बनकर ही मोदी का विकल्प खड़ा कर सकते हैं, भले इसमें वक्त लगे। पर ऐसे अवसरवादी गठबंधन तात्कालिक तौर पर हमें संतुष्ट या निराश भले करें, विकल्प नहीं मुहैया करा सकते। इसलिए काफी सोच विचार करने के बाद मेरे खुद के विचार से मोदी जैसा मुझे कोई नेता नहीं दिख रहा जो मोदी के सामान सबका साथ –सबका विकास को चरितार्थ कर सके, जो देश के प्रत्येक व्यक्ति से सीधा संबध स्थापित कर सके, जो गरीबो के हित की नीतियों को सुचारुरूप से चला सके, जो देशहित में दलहित को ताकपर रख कर निर्णय लेना, चाहे वो नोटेबंदी, सर्जिकल स्ट्राइक आदि व अभी-अभी चीन को दोक्लम में झुकाना हो, आप ही बताइए है मोदी का विकल्प? आप को यदि कोई विकल्प मिलता है तो मुझे भी बताइए कौन है?मै इंतज़ार मे हू आपके जवाब के बताइए?

इस नई तकनीक से स्वयं ठीक हो जाएंगे पंक्चर टायर


बॉस्टन! पंक्चर होने के बाद टायर के अपनेआप ही ठीक होने की कल्पना बहुत जल्द हकीकत बन सकती है। वैज्ञानिकों ने एक ऐसा रबर बनाया है जो ना सिर्फ काफी मजबूत है, बल्कि डैमेज होने पर स्वयं ही ठीक भी हो जाता है। अमेरिका के हार्वर्ड जॉन ए पॉल्सन स्कूल ऑफ इंजिनियरिंग व अप्लाइड साइंसेज (SEAS) के शोधकर्ताओं ने खुद ही ठीक होनेवाला हाइड्रोजेल बनाया है जो रिवर्सिबल (प्रतिवर्ती) बॉन्ड्स को सम्मिलित करने के लिए पानी पर आश्रित है और क्षतिग्रस्त हिस्से को ठीक करने में मदद करता है।

शोधकर्ताओं ने बताया, रबर जैसे सूखे पदार्थों में खुद ही ठीक होने की इंजिनियरिंग काफी चुनौतीपूर्ण है क्योंकि रबर बहुलकों (Polymers) से बना होता है और अक्सर सहसंयोजकों की वजह से स्थिर रहता है। ये बॉन्ड बहुत मजबूत होते हैं और एकबार टूटने के बाद दोबारा नहीं जुड़ते। स्वयं ही ठीक होनेवाले रबर के निर्माण के लिए टीम को बॉन्ड्स को रिवर्सिबल पॉलिमर्स (प्रतिवर्ती बहुलकों) से जोड़ने की जरूरत थी, ताकि बॉन्ड्स टूटकर खुद ही दोबारा बन जाएं।

SEAS के ली-हेंग काई बताते हैं, 'पिछले शोध में बहुलकों को जोड़ने के लिए रिवर्सिबल हाइड्रोजन बॉन्ड्स का इस्तेमाल हुआ था, लेकिन रिवर्सिबल बॉन्डस की अपेक्षा कोवेलेन्ट बॉन्ड्स कमजोर होते हैं।' काई ने बताया, 'इसके परिणाणस्वरूप यह सवाल उठा कि क्या हम ऐसी चीज बना सकते हैं जो खुद ही ठीक हो सके?' काई और चीन की सिशुआ यूनिवर्सिटी के उनके साथी प्रफेसर जिंगरोंग वू और उनके सहयोगियों ने सहसंयोजक और प्रतिवर्ती दोनों बॉन्ड्स से एक हाइब्रिड टायर बनाया। काई बताते हैं, 'दो प्रकार के ये बॉन्ड्स तात्विक रूप से आपस में नहीं मिलते, जैसे तेल और पानी।'
इन दोनों बॉन्ड्स को एकसाथ बांधने के लिए शोधकर्ताओं ने एक मॉलिक्यूलर रोप (आणविक रस्सी) बनाई। यह रस्सी इन दोनों अमिश्रणीय बॉन्ड्स को एक आणविक सीमा में मिश्रित होने देती है। ऐसा करने पर वे एक पारदर्शी, मजबूत और स्वयं की मरम्मत करनेवाले रबर का निर्माण करने में सक्षम हो जाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक रबर से बननेवाले अन्य उत्पादों में इस्तेमाल हो सकती है। वू कहते हैं, 'कल्पना करिए कि हम इस मटीरियल को टायर बनाने में एक घटक के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं।' उन्होंने कहा, 'अगर आपके टायर पर एक कट लग जाए तो उसे बदलने की जरूरत नहीं पड़ेगी। वह ड्राइविंग के वक्त खुद ही ठीक हो जाएगा।'

हलाला पर भी रोक लगाई जाए



फैज अहमद फैज ने अरसा पहले औरतों को झकझोरने की कोशिश की थी और कहा था- ‘बोल कि लब आजाद हैं तेरे, बोल ज़ुबां अब तक तेरी है…’। उनकी इस नज्म ने महिलाओं के ऊपर बहुत गहरा असर डाला। और अब सुप्रीम कोर्ट ने भी औरतों को कह दिया है- बोल कि लब आजाद हैं तेरे। आज का दिन यकीनी तौर पर मुस्लिम समाज की आधी आबादी के संघर्ष और उसकी खुशी को सलाम करने का है, उसके लिए ईद के जश्न जैसा है। बहुत अलग होता है देख कर कुछ कहना और जी कर कुछ कहना। तीन तलाक की पीड़ा इन औरतों ने भोगी है, इन्हें घर से बेघर किया गया है, सड़कों पर फेंका गया है। सदियों तक दिए जाने वाले धार्मिक हवाले उन्हें डराते रहे हैं और काबू में रखने की कोशिश करते रहे हैं। उनकी तकलीफ किसी ने नहीं सुनी। फिर आखिरकार वे बगावत पर उतर आईं और अब मजहबी हवाले उन्हें डरा नहीं रहे।
भोगी हुई जलालत
इस दौरान जितनी भी पीड़ा मुसलमान औरतों ने मौलवियों की तरफ से झेलीं, इस फैसले के बाद उन्हें माफ करते हुए आगे बढ़ना होगा। अभी इस तरह की कई अमानवीय प्रथाएं हैं, जिनके खिलाफ उन्हें लामबंद होना है। हलाला भी ऐसी ही प्रथा है। दीन के नाम पर चल रहे इस रिवाज की पड़ताल ने मेरी कायनात को झकझोर कर रख दिया। ‘क’ ने बताया कि 15 साल की उम्र में उनका निकाह हुआ था। जैसे ही वह गर्भवती हुईं, पति कहीं भाग गए और फोन करके तलाक बोल दिया। कई साल बाद पति माफी मांगते हुए घर ले जाने लगे तो मौलाना ने कहा- ‘बिना हलाला के ले नहीं जा सकते क्योंकि मरने के बाद कोई कंधा नहीं देगा, जनाजा नहीं उठेगा।’ आखिर उनकी उम्र से बहुत छोटा पड़ोस का एक लड़का लाया गया, जिससे उनका हलाला कराया गया। ‘ख’ के पति ने उन्हें ‘तलाक तलाक तलाक’ कहकर घर से निकाल दिया। मायके में बच्चों के साथ जीना बहुत मुश्किल था। पति दोबारा आए वापस ले जाने। साथ में एक को लाए हलाला कराने के लिए। उस आदमी से ख का निकाह कराया, लेकिन नए पति ने तलाक ही नहीं दिया। वह न इधर की हैं, न उधर की। ‘ग’ एक उच्च शिक्षा प्राप्त टीचर हैं। शादी होते ही उन पर नौकरी छोड़ने का दबाव बनाया गया। न छोड़ने पर एक दिन फोन से तलाक बोल दिया गया। दोबारा ले जाने की शर्त थी हलाला, जिसे ‘ग’ ने अस्वीकार कर दिया। आज तक मायके में रह रही हैं।

ऐसी बहुतेरी कहानियां आपको हर तरफ बिखरी मिल जाएंगी। यहां यह जानना दिलचस्प होगा कि इस्लाम के नाम पर चल रही हलाला प्रथा दरअसल एक पूर्व-इस्लामी रिवाज है। प्राचीन अरब के अधिकतर बद्दू समुदाय औरतों को भेड़-बकरियों की तरह अपने कब्जे में रखते थे। जब-तब उनकी संख्या हजार दो हजार तक भी होती थी। उन्हें वे जब तक चाहते रखते थे, जब चाहते तलाक-तलाक कह कर निकाल बाहर कर देते थे, और फिर जब चाहते वापस भी बुला लेते थे।
इस्लाम आने के बाद मोहम्मद साहब ने इस प्रथा का विरोध किया। यह बात सामने आई कि औरतों को इस तरह गुलाम बनाकर नहीं रखा जा सकता। जो महिलाएं बेसहारा हैं या जिनके पति युद्ध में मारे गए हैं, उनका यौन शोषण न हो, ऐसी महिलाओं से मर्द बाकायदा निकाह करें और उन्हें उनका पूरा हक दिया जाए। एक औरत को यदि तलाक दे दिया गया है तो तलाक देने वाला बाद में मन बदल जाने पर उसे यूं ही वापस नहीं ला सकता। यह तभी हो सकता है, जब उस महिला का किसी अन्य पुरुष से निकाह हुआ हो और किसी वजह से वहां उसका तलाक हो गया हो।
इसके समर्थन में कुरान (पारा 2 सूरः बकर आयत 230) से भी हवाला मिलता है, जो इस बात की तस्दीक है कि कुरान औरतों को यौन दासी बनाकर रखे जाने का समर्थन नहीं करती। कुरान के ही पारा नंबर 5 सूरः निसां की आयत नं. 3,19,व 24 भी इस बात को लेकर बार-बार आगाह करती हैं कि शारीरिक संबंधों में नाइंसाफी से बचो। पाकदामनी पर कुरान का बहुत ज्यादा जोर है। साथ ही कुरान में सूरः निसां में ही लिखा है कि मोमिनों तुमको जायज नहीं कि जबर्दस्ती औरतों के वारिस बन जाओ, खुद की हदों को पहचानो।
हलाला प्रथा उस समय एक तरह से मर्दों के साथ सख्ती थी कि वे किसी औरत को यौन दासी बनाकर नहीं रख सकते। लेकिन इस प्रथा का आज बहुत ही बुरा इस्तेमाल हो रहा है। जब चाहा तलाक दे दिया, फिर पत्नी को वापस लाने के लिए उसको किसी से निकाह करने और यौन संबंध बनाने को मजबूर किया, फिर उससे दोबारा निकाह किया। हाल में मुरादाबाद, दिल्ली और बिजनौर में कुछ मामले ऐसे पकड़े गए हैं जिनमें मौलवी बाकायदा हलाला सेंटर चला रहे थे।
धर्म का डर
फिक्र की बात यह है कि इसे धर्म का डर दिखा कर स्थापित किया जा रहा है और जो लोग मोटी रकम लेकर हलाला कर रहे हैं, वे भी इसे धार्मिक काम ही मान रहे हैं। गौरतलब है कि तीन तलाक बंद होने से हलाला का सबसे बड़ा आधार समाप्त हो गया है। भारत सरकार को जल्द से जल्द एक ऐसा मुस्लिम कानून बनाने की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए, जो भारतीय संविधान के मूल्यों पर आधारित हो और जिसमें महिलाओं के अधिकार सुरक्षित व सुनिश्चित हों। यहां यह ध्यान रखना भी जरूरी है कि स्त्री विरोधी प्रथाएं किसी एक धर्म तक सीमित नहीं हैं। इस मुल्क में आस्था के नाम पर अमानवीय प्रथाओं को रोकने की नजीरें मौजूद हैं। सती प्रथा, बाल विवाह, विधवा पुनर्विवाह आदि से जुड़े कानून सफलतापूर्वक लागू किए जा चुके हैं। मुस्लिम औरतें अब उम्मीद कर सकती हैं कि जैसे तीन तलाक पर रोक लगी है, वैसे ही एक दिन हलाला भी बंद हो जाएगा।

अगर कोई अल्लाहु अकबर चिल्लाए तो उसे गोली मार दी जाए


वेनिस। बार्सिलोना में आतंकी हमले में 13 लोगों की जान चली गई थी। इसके बाद इटली के शहर वेनिस के मेयर कुछ ज्यादा ही सतर्क हो गए हैं। उन्होंने आदेश जारी किया है कि अगर कोई अल्लाहु अकबर चिल्लाए तो उसे गोली मार दी जाए
मेयर लुइगी ब्रुगनारो द्वारा जारी आदेस में कहा गया है कि शहर के मशहूर सैंट मार्क्स चौराहे पर कोई भी अगर अल्लाहु अकबर चिल्लाया तो उस व्यक्ति को गोली मार दी जाए।
लुइगी ने कहा कि कोई मार्क्स स्क्वैयर की तरफ दोड़ते और अल्लाहु अकबर कहते हुए जाएगा तो उसे गोली मार दी जाएगी। हम गार्ड को सतर्क रहने के लिए कहेंगे। मैंने साल भर पहले कहा था ऐसा चार चरणों में किया जाए लेकिन अब यह तीन चरणों में करने के लिए कहा गया है।
उन्होंने आगे कहा कि वेनिस शहर, बार्सिलोना से ज्यादा सुरक्षित है जहां आतंकियों ने 13 लोगों को मार दिया था। बार्सिलोना में हुए आतंकी हमले के बाद वेनिस में कई महत्वपूर्ण जगहों पर सीमेंट के बैरियर्स लगा दिए गए हैं।
अपने इस आदेश को लेकर सफाई देते हुए उन्होंने कहा कि मैं कभी राजनीतिक रूप से सही नहीं होता, मैं गलत होता हूं, मैं मार दूंगा, हम उन्हें मार देंगे।

डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को रेप के मामले में दोषी करार, कौन है बाबा राम रहीम, क्या है मामला ?


विशेष सीबीआई अदालत ने शुक्रवार को डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को रेप के मामले में दोषी करार दिया। गुरमीत राम रहीम पर पंद्रह साल पहले अपने आश्रम की एक साध्वी से बलात्कार करने का आरोप है। इसके अलावा बाबा पर एक मुकदमा जान से मारने की धमकी देने का भी दर्ज किया गया था। 28 अगस्त यानी सोमवार को सजा की अवधि पर बहस होगी। बहरहाल, इस खास मामले में फैसले से भी ज्यादा महत्वपूर्ण वह घटनाक्रम है, जो फैसला सुनाए जाने से पहले और बाद में देखने को मिला।
क्या और कौन है बाबा राम रहीम

गुरमीत राम रहीम सिंह अपने माता-पिता की इकलौती संतान हैं। इनका जन्म 15 अगस्त, 1967 को राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के गुरुसर मोदिया में जट सिख परिवार में हुआ था। गुरमीत राम रहीम की माता का नाम नसीब कौर इंसान है। इन्हें महज सात साल की उम्र में ही 31 मार्च, 1974 को तत्कालीन डेरा प्रमुख शाह सतनाम सिंह ने नाम दिया था।
23 सितंबर, 1990 को शाह सतनाम सिंह ने देशभर से अनुयायियों का सत्संग बुलाया और गुरमीत राम रहीम सिंह को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया। डेरा प्रमुख की दो बेटियां और एक बेटा है। बड़ी बेटी चरणप्रीत और छोटी का नाम अमरप्रीत है। उन्होंने इन दो बेटियों के अलावा एक बेटी हनीप्रीत को गोद लिया हुआ है। इनकी बड़ी बेटी चरणप्रीत कौर के हसबैंड का नाम डॉक्टर शान-ए-मीत इंसान जबकि छोटी बेटी अमरप्रीत के पति का नाम रूह-ए-मीत इंसान है।
गुरमीत राम रहीम के बेटे जसमीत की शादी बठिंडा के पूर्व एमएलए हरमिंदर सिंह जस्सी की बेटी हुस्नमीत इंसान से हो रखी है। डेरा सच्चा सौदा का साम्राज्य विदेशों तक फैल हुआ है। अमेरिका, कनाडा और इंग्लैंड से लेकर ऑस्ट्रेलिया और यूएई तक उनके आश्रम व अनुयायी हैं। डेरे का दावा है कि दुनियाभर में उनके करीब पांच करोड़ अनुयायी हैं, जिनमें से 25 लाख अनुयायी अकेले हरियाणा में ही मौजूद हैं।
1 लाख अनुयायी रह सकते हैं डेरे में
1948 में स्थापित डेरे में पहले बाबा शाह मस्ताना जी थे। दूसरे गद्दीनशीं बाबा शाह सतनाम सिंह थे। वर्तमान बाबा गुरमीत राम रहीम तीसरे गद्दीनशीं हैं। अब डेरे की अरबों रुपये की सम्पत्ति पूरे भारत में है। आश्रम में एक समय में 1 लाख अनुयायियों के सभा स्थल की क्षमता है। आश्रम में एमएसजी दवाइयां व अन्य उत्पादों की फैक्ट्रियां भी हैं। जब बाबा सिरसा में होते हैं तो सुबह-शाम आश्रम में मजलिस को सम्बोधित करता है। अन्यथा हर महीने के अंतिम रविवार को बड़ा सत्संग होता है।
3 पेज के गुमनाम खत के कारण शिकंजे में फंसे डेरा सच्चा सौदा प्रमुख राम रहीम
यह चिट्ठी 13 मई 2002 को तत्कालीन पीएम अटल बिहारी वाजपेयी को लिखी गई थी। इस खत में एक लड़की ने सिरसा डेरा सच्चा सौदा में गुरु राम रहीम के हाथों अपने यौन शोषण का वाकया बताया था। (इस खत को हम ज्यों का त्यों छाप रहे हैं। कुछ जगह टाइपिंग अस्पष्ट होने के कारण कुछ त्रुटियां हो सकती हैं।)

सेवा में,
माननीय प्रधानमंत्री महोदय जी
श्री अटल बिहारी वाजपेयी, भारत सरकार
विषय : डेरे के महाराज द्वारा सैकड़ों लड़कियों से बलात्कार की जांच करें।
श्रीमान जी,
यह है कि मैं पंजाब की रहने वाली हूं और अब पांच साल से डेरा सच्चा सौदा सिरसा, हरियाणा (धन-धन सतगुरु तेरा ही आसरा) में साधु लड़की के रूप में सेवा कर रही हूं। मेरे साथ यहां सैकड़ों लड़कियां भी डेरे में 18-18 घंटे सेवा करती हैं। हमारा यहां शारीरिक शोषण किया जा रहा है। साथ में डेरे के महाराज गुरमीत सिंह द्वारा योनिक शोषण (बलात्कार) किया जा रहा है। मैं बीए पास लड़की हूं। मेरे परिवार के सदस्य महाराज के अंध श्रद्धालु हैं जिनकी प्रेरणा से मैं डेरे में साधु बनी थी। साधु बनने के दो साल बाद एक दिन महाराज गुरमीत की परम शिष्या साधु गुरुजोत ने रात के 10 बजे मुझे बताया कि आपको पिता जी ने गुफा (महाराज के रहने का स्थान) में बुलाया है। मैं क्योंकि पहली बार वहां जा रही थी, मैं बहुत खुश थी। यह जानकर कि आज खुद परमात्मा ने मुझे बुलाया है। गुफा में ऊपर जाकर जब मैंने देखा महाराज बेड पर बैठे हैं। हाथ में रिमोट है, सामने टीवी पर ब्लू फिल्म चल रही है। बेड पर सिरहाने की ओर रिवॉल्वर रखा हुआ है। मैं यह सब देखकर हैरान रह गई। मुझे चक्कर आने लगे। मेरे पांव के नीचे की जमीन खिसक गई। यह क्या हो रहा है। महाराज ऐसे होंगे? ऐसा मैंने सपने में भी नहीं सोचा था। महाराज ने टीवी को बंद किया व मुझे साथ बिठाकर पानी पिलाया और कहा कि मैंने तुम्हें अपनी खास प्यारी समझकर बुलाया है। मेरा यह पहला दिन था। महाराज ने मेरे को बांहों में लेते हुए कहा कि हम तुझे दिल से चाहते हैं। तुम्हारे साथ प्यार करना चाहते हैं क्योंकि तुमने हमारे साथ साधु बनते वक्त तन-मन-धन सब सतगुरु के अर्पण करने को कहा था। तो अब ये तन-मन हमारा है। मेरे विरोध करने पर उन्होंने कहा कि इसमें कोई शक नहीं हम ही खुदा हैं। जब मैंने पूछा कि क्या यह खुदा का काम है तो उन्होंने कहा –

1 - श्री कृष्ण भगवान थे, उनके यहां 360 गोपियां थीं जिनसे वह हर रोज प्रेम लीला करते थे। फिर भी लोग उन्हें परमात्मा मानते हैं, यह कोई नई बात नहीं है।

2 - यह है कि हम चाहें तो इस रिवॉल्वर से तुम्हारे प्राण पखेरू उड़ाकर दाह संस्कार कर सकते हैं। तुम्हारे घरवाले इस प्रकार से हमारे पर विश्वास करते हैं व हमारे गुलाम हैं। वह हमारे से बाहर जा नहीं सकते। यह तुमको अच्छे से पता है।

3 - यह कि हमारी सरकार में बहुत चलती है। हरियाणा पंजाब के मुख्यमंत्री, पंजाब के केंद्रीय मंत्री हमारे चरण छूते हैं। राजनीतिज्ञ हमसे समर्थन लेते हैं, पैसा लेते हैं और हमारे खिलाफ कभी नहीं जाएंगे। हम तुम्हारे परिवार के नौकरी लगे सदस्यों को बर्खास्त करवा देंगे। सभी सदस्यों को अपने सेवादारों (गुडों) से मरवा देंगे। सबूत भी नहीं छोड़ेंगे। यह तुम्हें अच्छी तरह पता है कि हमने गुंडों से पहले भी डेरे के प्रबंधक फकीर चंद को खत्म करवा दिया था जिनका अता-पता तक नहीं है। ना ही कोई सबूत बकाया है। जो कि पैसे के बल पर हम राजनीतिक व पुलिस और न्याय को खरीद लेंगे।
इस तरह मेरे साथ मुंह काला किया और पिछले तीन मास में 20-30 दिन बाद किया जा रहा है। आज मुझको पता चला कि मेरे से पहले जो लड़कियां रहती थीं, उन सबके साथ मुंह काला किया गया है। डेरे में मौजूद 35-40 साधु लड़की 35-40 वर्ष की उम्र से अधिक हैं जो शादी की उम्र से निकल चुकी हैं। जिन्होंने परिस्थितियों से समझौता कर लिया है। इनमें ज्यादातर लड़कियां बीए, एमए, बीएड, एमफिल पास हैं मगर घरवालों के अंधविश्वासी होने के कारण नरक का जीवन जी रही हैं।
हमें सफेद कपड़े पहनना, सिर पर चुन्नी रखना, किसी आदमी की तरफ आंख न उठाकर देखना, आदमी से 5-10 फुट की दूरी पर रहना महाराज का आदेश है लेकिन दिखाने में देवी हैं मगर हमारी हालत वेश्याओं जैसी है। मैंने एक बार अपने परिवारवालों को बताया कि डेरे में सबकुछ ठीक नहीं है तो मेरे घर वाले गुस्से में होते हुए कहने लगे कि अगर भगवान के पास रहते हुए ठीक नहीं है तो ठीक कहां है। तेरे मन में बुरे विचार आने लग गए हैं। सतगुरु का सिमरण किया कर। मैं मजबूर हूं। यहां सतगुरु का आदेश मानना पड़ता है। यहां कोई भी दो लड़कियां आपस में बात नहीं कर सकतीं। घरवालों को टेलिफोन मिलाकर बात नहीं कर सकतीं। घरवालों का हमारे नाम फोन आए तो हमें बात करने का महाराज के आदेशानुसार हुक्म नहीं है। यदि कोई लड़की डेरे की इस सच्चाई के बारे में बात करती है तो महाराज का हुक्म है कि उसका मुंह बंद कर दो। पिछले दिनों बठिण्डा की लड़की साधु ने जब महाराज की काली करतूतों का सभी लड़कियों के सामने खुलासा किया तो कई साधु लड़कियों ने मिलकर उसे पीटा। जो आज भी घर पर इस मार के कारण बिस्तर पर पड़ी है। जिसका पिता ने सेवादारों से नाम कटवाकर चुपचाप घर बैठा दिया है। जो चाहते हुए भी बदनामी और महाराज के डर से किसी को कुछ नहीं बता रही।
एक कुरुक्षेत्र जिले की एक साधु लड़की जो घर आ गई है, उसने अपने घर वालों को सब कुछ सच बता दिया है। उसका भाई बड़ा सेवादार था, जो कि सेवा छोड़कर डेरे से नाता तोड़ चुका है। संगरूर जिले की एक लड़की जिसने घर आकर पड़ोसियों को डेरे की काली करतूतों के बारे में बताया तो डेरे के सेवादार / गुंडे बंदूकों से लैस लड़की के घर आ गए। घर के अंदर से कुंडी लगाकर जान से मारने की धमकी दी व भविष्य में किसी से कुछ भी नहीं बताने को कहा। इसी प्रकार कई लड़कियां जैसे कि जिला मानसा (पंजाब), फिरोजपुर, पटियाला, लुधियाना की हैं। जो घर जाकर भी चुप हैं क्योंकि उन्हें जान का खतरा है। इसी प्रकार जिला सिरसा, हिसार, फतेहबाद, हनुमान गढ़, मेरठ की कई लड़कियां जो कि डेरे की गुंडागर्दी के आगे कुछ नहीं बोल रहीं।
अत: आपसे अनुरोध है कि इन सब लड़कियों के साथ-साथ मुझे भी मेरे परिवार के साथ जान से मार दिया जाएगा अगर मैं इसमें अपना नाम-पता लिखूंगी। क्योंकि मैं चुप नहीं रह सकती और ना ही मरना चाहती हूं। जनता के सामने सच्चाई लाना चाहती हूं। अगर आप प्रेस के माध्यम से किसी भी एजेंसी से जांच करवाएं तो डेरे में मौजूद 40-45 लड़कियां जो कि भय और डर में हैं। पूरा विश्वास दिलाने के बाद सच्चाई बताने को तैयार हैं। हमारा डॉक्टरी मुआयना किया जाए ताकि हमारे अभिभावकों व आपको पता चल जाएगा कि हम कुमारी देवी साधु हैं या नहीं। अगर नहीं तो किसी के द्वारा बर्बाद हुई हैं। ये बता देंगे कि महाराज गुरमीत राम रहीम सिंह जी, संत डेरा सच्चा सौदा के द्वारा तबाह की गई हैं।

- प्रार्थी
एक निर्दोष जलालत का जीवन जीने को मजबूर (डेरा सच्चा सौदा सिरसा)

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हमारे सिस्टम के लिए यह घटनाक्रम किसी सबक से कम नहीं है। मामले की सुनवाई पूरी होते ही बाबा समर्थकों का जमावड़ा चंडीगढ़ से पंचकूला तक दिखाई देने लगा। उनके तेवर आक्रामक थे और उनके पास हथियार होने की खबर थी। उन्होंने बढ़-चढ़कर मीडिया को बताया कि अगर बाबा को सजा हुई तो वे उत्पात करेंगे। ज्यों ही बाबा को दोषी करार दिए जाने की खबर आई, तोड़फोड़ और आगजनी शुरू हो गई, जिसमें कुछ लोगों के मारे जाने की भी खबर है। सवाल यह है कि प्रशासन ने इतना बड़ा जमावड़ा होने ही क्यों दिया? क्या इसलिए कि खासकर हरियाणा व पंजाब का प्रशासन खुद भी बाबा के आभामंडल में जी रहा था और बाबा समर्थकों की नाराजगी से बचना चाहता था? इस मामले ने हमारे राजनीतिक नेतृत्व को भी एक्सपोज किया है।
हमारे नेतागण किसी समुदाय विशेष का समर्थन हासिल करने के लिए उसका सहयोग लेते हैं और बदले में उसे अपना संरक्षण देते हैं। इसी के बूते ऐसे समुदायों के प्रमुख अपना प्रभाव बढ़ाते चले जाते हैं। अभी जब अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया है और उसकी सजा तय करने की प्रक्रिया में है, तब अराजकता फैलाकर दबाव बनाने की इजाजत किसी को नहीं दी जा सकती। हां, प्रशासन को सख्ती बरतते वक्त यह एहतियात बरतना चाहिए कि आस्था के नाम पर भीड़ के साथ चले आए औरतों, बच्चों और अशक्त लोगों को कोई नुकसान न पहुंचे। बाबा के समर्थकों के पास अपना पक्ष शांति से रखने का हक है। इस फैसले को ऊपरी अदालत में चैलेंज भी किया जा सकता है। लेकिन भावनाओं के नाम पर उग्र होने का हक किसी को भी नहीं दिया जा सकता। इससे एक धर्मगुरु की छवि पर और भी बुरा असर पड़ेगा।

जितना सफर अभी आप एक लीटर पेट्रोल में कर पाते हैं उतना सफर करने में आपको सिर्फ आधे लीटर पेट्रोल की जरूरत होगी। वह भी सिर्फ 500 रुपये की एक डिवाइस की बदौलत,


जितना सफर अभी आप एक लीटर पेट्रोल में कर पाते हैं उतना सफर करने में आपको सिर्फ आधे लीटर पेट्रोल की जरूरत होगी। वह भी सिर्फ 500 रुपये की एक डिवाइस की बदौलत, क्योंकि 12वीं तक पढ़े विवेक ने एक ऐसा कार्बोनेटर विकसित किया है जिसे गाड़ी में फिट करने पर वह दोगुना माइलेज देने लगती है।
भारत में प्रतिभाओं की कमी नहीं, ऐसे में उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले में रहने वाले विवेक कुमार पटेल ने कर दिखाया है एक अनोखा कारनामा।
12वीं की परीक्षा पास करने के बाद विवेक के पास न तो आगे की पढ़ाई के लिए पैसे थे और न ही कोई ढंग का रोजगार। इसलिए वह मोटरसाइकिल रिपेयर करने वाली दुकान पर काम करने लगे।
बढ़ती पेट्रोल की कीमतों से हर आम आदमी परेशान है। आजकल तो लगभग हर किसी के पास या उसके घर में मोटरसाइकिल तो होती ही है। लेकिन कितनी भी किफायती बाइक क्यों न हो, 60-70 से ज्यादा का माइलेज नहीं मिलता। अगर सोचिए कि आपकी गाड़ी 150 का माइलेज देने लगे तो। यानी जितना सफर अभी आप एक लीटर पेट्रोल में कर पाते हैं उतना सफर करने में आपको सिर्फ आधे लीटर पेट्रोल की जरूरत होगी। वह भी सिर्फ 500 रुपये की एक डिवाइस की बदौलत। आप सोच रहे होंगे कि ऐसा भला कहां संभव है, लेकिन भारत में प्रतिभाओं की कमी तो है नहीं। ये कारानमा कर दिखाया है उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले में रहने वाले विवेक कुमार पटेल ने।
आपको यह अजूबा लग सकता है, लेकिन यह हकीकत है। सिर्फ 12वीं तक पढ़े विवेक ने एक ऐसा कार्बोनेटर विकसित किया है जिसे गाड़ी में फिट करने पर वह दोगुना माइलेज देने लगती है। 12वीं की परीक्षा पास करने के बाद विवेक के पास न तो आगे की पढ़ाई के लिए पैसे थे और न ही कोई ढंग का रोजगार। इसलिए वह मोटरसाइकिल रिपेयर करने वाली दुकान पर काम करने लगे। दुकान पर बैठकर उनका दिमाग कुछ न कुछ खुराफात करता रहता था। वह हमेशा से इसी कोशिश लगे रहते थे कि कैसे माइलेज को बढ़ाया जाए। उन्होंने इंजन के कार्बोनेटर में बदलाव किया और फिर उनकी गाड़ी 150 का एवरेज देने लगी।
आज जहां कोई भी बाइक 60-70 का माइलेज बहुत मुश्किल से देती है वहीं विवेक का जुगाड़ बड़े आराम से 150 का एवरेज दे देता है। अगर देखा जाए तो ऑटोमोबाइल की दुनिया में यह एक चमत्कारिक अविष्कार है। उत्तर प्रदेश काउंसिंल फॉर साइंस ऐंड टेक्नॉलजी(यूपीसीएसटी) और मोती लाल नेहरू नैशनल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी इलाहाबाद ने विवेक की इस तकनीक को प्रमाणित भी किया है। यूपीसीएसटी के इनोवेशन ऑफिसर संदीप द्विवेदी ने बताया कि काउंसिल ने इनोवेशन को तकनीकी रूप से प्रमाणित करने के लिए MNIIT के मैकेनिकल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट से इसकी टेस्टिंग कराई। जांच में तकनीक सही पाई गई। अब विवेक ने अपनी ईजाद की गई तकनीक को पेटेंट रजिस्ट्रेशन के लिए भी अप्लाई किया है।
विवेक की प्रतिभा से प्रभावित होकर कटरा के श्री माता वैष्णव देवी यूनिवर्सिटी के टेक्नोलॉजी बिजनेस इंक्यूबेशन सेंटर ने स्टार्टअप प्रॉजेक्ट के लिए 75 लाख रुपए की मदद भी स्वीकृत कर दी है। खास बात यह है कि माइलेज बढ़ने के बावजूद बाइक की परफॉर्मेंस पर कोई असर नहीं हुआ। इस प्रॉजेक्ट पर बिट्स पिलानी के स्टूडेंस भी काम कर रहे हैं। विवेक आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से ताल्लुक रखते हैं और उनका परिवार सिर्फ खेती पर निर्भर है। विवेक ने कभी सोचा भी नहीं था कि बाइक को मोडिफाई करने की जुर्रत उनकी तकदीर बदल सकती है।
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The journey to historic triple talaq Judgment, How the Case was argued in Court.


In a historic decision Tuesday, the Supreme Court announced three-thirds unconstitutional controversial practice. He also asked the government to make a new law on this matter, and until the Parliament prepared a law on this matter, the practice of quick treble trickers was stopped.
The Supreme Court questioned what was the legal clearance to the triple stock practice. How the acceptance of this constitution is implemented in relation to the fundamental rights given to each citizen of India by the Constitution.
Those opposing this practice argued that Triple Locker is discriminating against women and against their fundamental rights and dignity.
On the other hand, the All India Muslim Personal Law Board (AIMPLB), which claimed three liquid validity, argued that the court should not interfere on this issue as it is a matter of faith.
"Personal law has been prepared with the Koran, hadith and three talents, 1,400 years old, we are saying that it is Islamic. It is not a question of good conscience or ethics but it is a question of faith, it is not a question of constitutional morality. , "Senior lawyer Kapil Sibal, who represented the board, told the court in May.
Here are the three arguments and arguments against it
Triple talc is discriminatory and 'bad' law
The trial against Tatkal Talek immediately began with a petition filed by Sharara Bano in 2016, after which the 15-year marriage ended in 2015.
In his petition, Bano argued that Talak-e-Bidat, Nicara Halla (a remarriage practice) and the practice of polyandry should be declared illegal and unconstitutional because they violate Article 14, 15, 21 and 25 of the Constitution .
Article 14 provides equality before law, Article 15 prohibits discrimination based on religion, race, caste, sex or place of birth, Article 21 supports the right of life and personal freedom, and in the end, Article 25 person Gives the right to freedom of discretion and the right to preach, practice and propagate a religion
In its petition, it has been said, "The practice of a woman violates the fundamental right to live with the dignity of every Muslim woman without trying to reconcile without the practice of divorce of Talab-e-Bidat and a woman."
"Muslim women have been locked up on Skype, Facebook and text messages, there is no security against such a controversial divorce. Muslim women are bound by hands while divorces of Guilotines hang, they are considered to be husband's sensibilities Unquestionable power. In the light of the progressive time of the 21st century, when such a discrimination and inequality is expressed abhorrently as the one-sided triaphalak, It adds ".
The petitioners argued that the immediate trilax may not be appropriate in the context of modern law, which, in the context of gender equality or religious sanction,
Another petitioner, West Bengal's Ishrat Jahan, in his petition filed in 2016, had said, "The practice of Talab-e-Batat (one-sided three-taluk) that practically behaves like women, neither does modern human rights It is harmonious with the principles of gender equality, or an integral part of the Islamic belief, according to various scholars. "
"According to many scholars, divorce-a-bit is not a form of recognized divorce in the Holy Quran because the holy book provides reconsideration to reconsider and provide immutability before identifying divorce."
Lawyer Indira Jai Singh, appearing for a Muslim women organization, Bebeak Collective, argued that "personal law" can not be freed from the constitution of India, Devjibblog said.
The important question was raised, "Private laws will have to investigate fundamental laws."
"In spite of the legal system, all the systems must follow the discipline of the constitution at the end of the day," he said.
"What prevents the constitution where the family law begins?" He asked.
Explaining that marriage was a contract with life-transforming influences, it argued that the interests of both the parties involved in the dissolution were to take immediate triple coppieces, however, they argued that it was a completely unilateral process that women There was no place for consent. "The bottom line is the consent because as a person, we are all citizens and are equal", he said.
Apart from this, while pointing out the lack of judicial inspection on the process of three takasak, Jassig argued that it was unconstitutional. "No matter how generously you interpret three troubles, it is one-sided. This is an additional judicial unilateral process and the result is final without any discussion."
Can not interfere with Triple Lock
The AIMPLB argued that the petitions challenging the decision of the multiparty between Triple Talek, Leela Halla and Muslims are out of the purview of the judiciary and there are issues of legislative policy. It was told to the Supreme Court that
for indian democracy it is very necessary that there will be equal law and order for all. today the judgmeent given by Hon'ble Apex Court is good for everyone.

Good news for mobile phone users, call drop rules tightened; here is how you can benefit


The penalty can even go up to Rs 10 lakh if operators fail to meet the benchmark for three consecutive quarters.

The Telecom Regulatory Authority of India on Friday made its quality of service norms relating to call drops more stringent by changing the measurement criteria — moving from the circle level to the tower level — and steeply increased the penalty for breaching the benchmark from Rs 1 lakh per violation to a maximum of Rs 5 lakh. The penalty can even go up to Rs 10 lakh if operators fail to meet the benchmark for three consecutive quarters. “We have proposed financial disincentive in the range of Rs 1-5 lakh. It is a graded penalty system depending on the performance of a network,” Trai chairman RS Sharma said. According to Trai secretary (acting) SK Gupta, if an operator fails to meet the call drop benchmark in a consecutive quarter, the penalty amount will be hiked 1.5 times and in the third consecutive month it will be doubled. “However, there is cap of `10 lakh on financial disincentive,” Gupta said. Unlike the previous regulation which allowed call drops up to 2% on average in a circle, the new methodology has introduced a drop call rate (DCR) spatial distribution measure, which means that call drop rate should not exceed 2% for 90% of the telecom towers of an operator in a circle for at least 90% of the days. This means call drops will not be measured on the basis of circle but that of towers.
Similarly, the DCR temporal distribution measure stipulates that in the worst case or during busy hours, call drop rate must not exceed the 3% benchmark for 97% of the towers in a telecom circle for 90% of the days. “We have added a temporal (time-based) and a spatial (geography-based) calculation for call drops. This will be done on a percentile basis. Averages many times hide many things. This new method will help in providing good services to even areas which suffered even though the overall call drop level was within the stipulated level,” Sharma said.
The calculations will be made on a quarterly basis. These new regulations will be applicable from October 1, 2017, which means that the October-December period will be the first quarter when this system will come into effect. Industry body Cellular Operators’ Association of India’s (COAI) director general Rajan S Mathews said that the amendment has made the benchmarks more stringent with a shift in methodology towards a cell-wise measurement.
“Quality of service available from a network is dependent on a number of extraneous factors which may not only be environmental. These include factors such as number of users accessing the network at that time; the area covered by the BTS (base transceiver station); whether the customer is indoors or outdoors, application being used by the customer; peak/off-peak time; kind of device or hardware being used; additional external interference as well as the quantum of spectrum available. All of these are dynamic in nature and the slightest variations in these parameters can cause major changes in the QoS,” he added.
Mathews added that issues such as right-of-way and misinformation regarding EMF emission are also major problems preventing telecom operators from accessing crucial sites for setting up telecom towers. “As there are a lot of technicalities involved in call drops, if and when they occur they do in pockets; therefore, a collaborative approach is the most conducive one for resolving this challenge, which the industry has been grappling with on an everyday basis, despite additional investments and constant enhancement of infrastructure,” Mathews said.
Here is some tweet on tweeter about this decision:-




Kalinga Utkal Express train accident LIVE


Kalinga Utkal Express train accident LIVE: In an unfortunate event, Puri Haridwar Kalinga Utkal Express derailed in Khatauli, a town near Muzaffarnagar of Uttar Pradesh. As many as 14 coaches went off track and over 50 people have been reported injured in the incident. The train was going to Haridwar with its arrival time scheduled at 9 PM. The incident took place at around 5:50 PM. The government has confirmed 23 deaths, however, the number can go up. The reason behind the accident is still not clear. Rescue operations are still on. Locals have reached the spot are helping with the relief operations. An ATS team is also probing a terror angle in the accident.
Here are all the Live updates:
10.52 pm: Due to derailment, TRAINS ARE DIVERTED, 14681:GZB-DELHI-PANIPAT-UMB. 12055:HPU-MB-DDN. 1/1

10.44 pm: About 60-70 injured people have been rescued, rescue ops underway. About 20 dead bodies have been recovered so far: NDRF DG Sanjay Kumar
10.40 pm: BJP president Amit Shah today expressed grief over the loss of lives in a train accident in Muzaffarnagar in western Uttar Pradesh, and said he had asked the local party unit to join the rescue efforts.
10.30 pm: I am going to Muzaffarnagar train derailment site, our teams there are fully equipped. Will rescue stranded ppl asap:NDRF DG Sanjay Kumar
10.25 pm: “Extremely saddened to know about tragic accident of the Utkal Express in Muzaffarnagar. My thoughts are with the families of the deceased,” Nadda said.
10.20 pm: “Spoken to Union Railways Minister Shri @sureshpprabhu and Health minister UP @sidharthnsingh . @MoHFW_INDIA is ready to provide all support,” Nadda tweeted.

10.10 pm: In response to Nadda’s Tweet, Prabhu said he was thankful to Nadda for offering the medical relief to the injured.

10.05 pm: Union Health Minister J P Nadda spoke to Railways Minister Suresh Prabhu and offered all medical support required for the victims of the train derailment in Muzaffarnagar in western Uttar Pradesh today.

10.00 pm: Due to derailment of Puri-Haridwar Utkal Kalinga Express near Khatauli Station Yard, 10 trains have been diverted.
9.45 pm: Around 100 pax were coming to Haridwar, 10 coach relief train is being run from Saharanpur: MK Singh, Station Master Haridwar
9.35 pm: The number of injured figure (400) as typed in the note is by mistake. We will post the correct figure soon: DGP PRO Rahul Srivastava

9.20 pm: Union Health Minister JP Nadda asked central trauma care teams to remain on standby.
9.15 pm: 11 dead bodies and 65 injured brought to Khatauli hospital: UP Principal secretary (Home) Arvind Kumar
9.00 pm: Spoken to Union Railways Minister Suresh Prabhu and UP Health minister UP, Ministry of Health is ready to provide all support: JP Nadda
8:54 PM Big lapse on the part of Indian Railways has come to the fore; it is a likely cause of accident
8:40 PM: Meanwhile, Anil Saxena has confirmed that 14 coaches of the train were derailed.
8:35 PM: Railway Minister Suresh Prabhu has announced ex gratia of 3.5 Lakh for those who lost their lives, Rs.50 thousand for seriously injured

8:32 PM: Zee News reports that 14 coaches of the train were derailed. If this number is to go by then the casualties can increase significantly.

8:30 PM: ANI reports citing sources that repair work was underway on the track which could be the reason behind the derailment.
8:27 PM: Anand Kumar has ANI that at least 30-40 people have been seriously injured in the accident. He also revealed that 30 ambulances have reached the spot.
8:22 PM: Prime Minister Narendra Modi has reacted to the incident. “I wish those injured a speedy recovery. The situation is being monitored very closely by the Railways Ministry,” PMO said in a tweet.

8:19 PM: Anand Kumar has confirmed that 10 people are dead in the accident so far.
8:17 PM: Here are the helpline numbers:



here some other tweets -



Ratan Tata said to INC Minister Anand Sharma that Politicians could be shameless but not him


One of the Richer Rich of India, Ratan Tata, while refusing to be pressurized by an Indian Politician to trade with Pakistani Industrialists simply told the then Congress minister, Anand Sharma, that he (Sharma) could be shameless, he is not and put the phone down. Sharma was felicitating two frustrated Pakistani industrialists who, after trying all possible means, failed to get an appointment with Tata.
Few months after 26/11, Taj group of Hotels owned by TATA launched their biggest tender ever for remodeling all their Hotels in India and abroad. Some of the Pakistani companies also applied for that tender. To make their bid stronger, two big industrialists from Pakistan visited Bombay House (Head office of Tata) in Mumbai without an appointment to meet up with Ratan Tata since he was not giving them any prior appointment. They were made to wait at the reception of Bombay house and after a few hours, a message was conveyed to them that Ratan Tata is busy and cannot meet anyone without a prior appointment.
Frustrated, these two Pakistani industrialists went to Delhi and through their High Commission met up the then minister, Anand Sharma, who immediately called up Ratan Tata requesting him to meet up with the two Pakistani Industrialists and consider their tender- enthusiastically. Ratan simply replied: “You could be shameless; I am not and put the phone down”.
Few months later when Pakistani government placed an order for Tata Sumos to be imported into Pakistan, Ratan Tata refused to ship a single vehicle to that country. This is his respect and love for his motherland. He placed the nation above money and business.
Not to forget, Ratan is a man of Parsi origin that constitutes one of the two Zoroastrian communities of the Indian subcontinent. His community is minuscule in India but every single one of them has made India proud. While Tata Parivar is full of Patriotism, we have some so-called minorities who are either busy begging freebies or helping Pakistan plant bombs. And when they are caught, they fake victim-hood and make martyrs out of terrorists.
Also, the incident of Ratan Tata has exposed that some of the contemporary Legislators and Parliamentarians, instead of drafting legislation and codifying various practices of the multi-ethnic – cultural Indian society, are either busy in grabbing the musical chair for plum posts, or acting as a mediators for rich and affluent in the society to bag central or state government contracts and supplies, aiming for kickbacks in every project or dealing. They are unknowingly acting as agents even for some vested interest groups or counties.
In most cases, the politicians are acting as mediators between the Government and industrialists. In some cases, the politicians themselves are industrialists hence, limiting the national growth within the affluent; end result: the rich are getting richer while the poor getting poorer; the disparity is so evident in India.
In the case of Ratan Tata, the scar inflected on his Taj group of Hotels on 26/11 is considered as a National Shame due to the external intrusion under the aegis of Pakistan. Hence, he does not want any trading with the country which never misses an opportunity to harm India. His action have kept National Pride above his business, while some of the Indian politicians do not hesitate even to sell the nation if they are benefiting from the deal.
Now, I hope you clearly understand that why the Mr. Rahul Gandhi met with Chinese Embassy, why within 60 years no any real action was taken against the Kashmiri Separatist leaders for making unpeaceful Kashmir, why Congress seeking help for defeat to Narendra Modi.
Now What are against these type anti-nationalist politician like Anand Sharma, Mani Shankar Ayyar, raise your voice against anti-nationalist politician and save your country.
Are you against Anti-nationalist Politician like Congress Leader Anand Sharma?

कौन जिम्मेदार है 63 निर्दोष व मासूम बच्चों की मृत्यु के लिए ?

गोरखपुर त्रासदी के बीच में, बाबा राघव दास (बीआरडी) मेडिकल कॉलेज के एक बाल रोग विशेषज्ञ ने नायकों को संभवतः कई बच्चों के रूप में सहेजते हुए स्वागत किया है। एन्सेफलाइटिस वार्ड और एक बाल रोग विशेषज्ञ के प्रमुख डॉ काफिल खान ने अस्पताल में कई बच्चों और माता-पिता को बचाने में कामयाब होने के बाद कहा था कि यह  काम आसान नहीं था, पिछले 48 घंटों में मृत्यु की संख्या 36 से अधिक होगी । डॉ काफिल खान ने 11-12 अगस्त को गोरखपुर के बीआरडी-मेडिकल-कॉलेज को तेजी से फैलाने वाले आपदा के लिए अपने दुश्मनी त्वरित प्रतिक्रिया के लिए सुर्खियों में सुर्खियों के बाद रिपोर्ट दी है कि रिपोर्ट बताती है कि डॉ काफिल खान अपने निजी क्लिनिक के लिए अस्पताल से ऑक्सीजन सिलेंडर चोरी कर रहा था। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के बाल चिकित्सा संस्थान के नोडल अधिकारी, डॉ काफिल खान को सभी अस्पताल के कर्तव्यों से हटा दिया गया है क्योंकि रिपोर्ट सामने आई है कि ऑक्सीजन सिलेंडर की अपर्याप्तता आंशिक रूप से थी क्योंकि वह चुपके से कुछ अपने क्लिनिक में ले जा रहा था।

शनिवार को बर्खास्त किए जाने वाले प्रिंसिपल डॉ को भी खान के साथ मिलकर गडबडिय़ो मे शामिल होने का सबूत मिला है। एक विज्ञापन के अनुसार, 12 अगस्त की अंतराल रात में अस्पताल से एक संकट से पीड़ित होने पर एन्सेफलाइटिस वार्ड के प्रमुख डॉ काफिल खान  ने कुछ सवाल उठाए- नोडल अधिकारी को ऑक्सीजन की आपूर्ति में कमी के बारे में क्या जानकारी हो सकती है अपने रोगियों के लिए? अपने क्लिनिक के विज्ञापन अब भी बीआरडी अस्पताल की दीवारों पर चिपकाए गए हैं, जो पढ़ते हैं, "डॉक्टर 9 बजे से 9 बजे तक उपलब्ध है।" इसके अलावा, डॉ काफिल खान भी आपूर्ति विभाग के सदस्य थे - जो चिकित्सा उपकरणों के भंडार और भंडार से संबंधित हैं।

9 अगस्त को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मेडिकल कॉलेज के दौरे के दौरान डॉ। कैफेल खान एक डॉक्टर थे जिन्होंने उनकी समीक्षा में सहायता की थी, लेकिन कर्मचारियों के अनुसार- न ही उन्होंने मुख्यमंत्री को ऑक्सीजन सिलिंडरों की आपूर्ति और न ही अस्पताल के बारे में जानकारी दी भुगतान पर चूक।

जब 11 अगस्त की रात को नियंत्रण से बाहर निकलने की स्थिति में डॉ काफिल खान ने जल्द ही अपने क्लिनिक से अस्पताल में तीन ऑक्सीजन सिलिंडरों को भेजा- यह दिखाते हुए कि उन्होंने उन लोगों से 'उधार लिया'जब ऑक्सीजन की आपूर्ति शुक्रवार की सुबह 7 बजे बंद हो गई, तो डॉ काफिल ने अपनी कनिष्ठ डॉक्टरों की टीम के साथ मरीजों को सुनिश्चित करने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास किया और उनके देखभाल करने वाले शांत रह गए। 

बीआरडी कॉलेज के अन्य डॉक्टरों के कनिष्ठ कर्मचारियों से बात करते हुए, यह सामने आया कि खान और उसके बाद के प्रिंसिपल डॉ राजीव मिश्रा को हर अस्पताल की खरीद पर एक कमीशन प्राप्त हुआ और ऑक्सीजन सिलेंडर सप्लायर-पुष्पा सेल्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ सौदों को संभाला।

आरोप हैं कि डॉ काफिल खान, बीआरडी मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल डॉ राजीव मिश्रा और उनकी पत्नी पूर्णिमा शुक्ला के साथ मिलकर, 68 मरीजों की मौत के लिए जिम्मेदार हैं।

लेकिन, खान, जिसे नायक और उद्धारकर्ता के रूप में चित्रित किया जा रहा है, हो सकता है कि वह सही मे हीरो न हो।
डॉ काफिल अहमद खान को दिल्ली पुलिस ने 2009 में पीजी मेडिकल परीक्षा में एक और व्यक्ति के स्थान पर परीक्षा मे बैठने लिए गिरफ्तार किया था।
एनबीई विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट परीक्षा (एफएमजीई) का आयोजन कर रहा था, जो सभी डॉक्टरों के लिए अनिवार्य है जिन्होंने विदेशी विश्वविद्यालयों से अपनी मेडिकल डिग्री प्राप्त की है और केंद्र में भारत में अभ्यास करना चाहते हैं। एक पुलिस अधिकारी ने कहा, "हमें परीक्षा केंद्र से एक कॉल मिला, जो हमें आने के लिए कह रहा है। जब हम पहुंचे, तो दो डॉक्टरों को पकडा गया था," यह स्पष्ट हुआ कि एक अनजानकर्ता ने एक प्रकट उम्मीदवारों में से किसी पर कुछ गलत पाया और एनबीई के रोविंग निरीक्षक को परीक्षा कक्ष में बुलाया। एक पृष्ठभूमि की जांच से पता चला कि परीक्षा में आने वाले उम्मीदवार विजय कुमार नहीं थे, जिन्होंने हाल ही में एक रूसी मेडिकल कॉलेज से मेडिकल डिग्री ली थी, लेकिन एक लखनऊ स्थित डॉक्टर डॉ काफिल थे। "हम तुरंत उसे हिरासत में ले लिया। इस तरह के मामलों के संदेह में, हम सभी उम्मीदवारों, विशेष रूप से पुरुषों, पर पूरी तरह से जांच करने का फैसला किया"।

कुछ रिपोर्टों के मुताबिक, खान ने एक लड़की को बलात्कार करने के लिए जेल में एक साल भी बिताया, उन्होंने धमकी दी कि वह घटना के बारे में किसी को भी रिपोर्ट न करें।
डॉ। कैफेल अहमद बीएआरडी कॉलेज में एन्सेफलाइटिस विभाग के मुख्य नोडल अधिकारी हैं, जो एसपी सरकार द्वारा नियुक्त किए गए हैं।
वह आजाद चौक में प्रसिद्ध मेडिसिपग बाल अस्पताल का मालिक है और चलाता है, प्रशासनिक काम में होने के बावजूद और इस तरह के महत्वपूर्ण पद धारण करने के बावजूद।
उन्हें मणिपल विश्वविद्यालय द्वारा उनके खिलाफ आपराधिक मामले के लिए निलंबित कर दिया गया था और उच्च न्यायालय ने फैसले को बरकरार रखा था।
वह अखिलेश यादव का बड़ा प्रशंसक हैं और अब वे अखिलेश को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में वापस जाना चाहते हैं।
तो की इस पूरी गाथा "ऑक्सीजन की आपूर्ति बंद कर दिया" उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार को उखाड़ फेंकने में मदद करने के एक सुनियोजित नाटक हो रहा है।




  इसलिए कृपया सभी के तथ्यों पर विचार करें और फिर किसी पर अपनी उंगली उठायें।




यह सब तथ्यों से स्पष्ट रूप से पता चलता है कि संपूर्ण मामला दुर्भावनापूर्ण था और केवल योगी सरकार को फंसाने के लिय व बदनाम करने के लिये और केवल अखिलेश यादव को खुशी देने के लिए गढ़ी  गई थी
मैं किसी भी तरह योगी सरकार को समर्थन नहीं करता हूंलेकिन मैं सच्चाई का समर्थन करता हूं और मैं इस तरह की गिरी हुई राजनीति के खिलाफ हूं।
कौन जिम्मेदार है 63 निर्दोष व मासूम बच्चों की मृत्यु के लिए ?
अपनी राय अवश्य दें






http://devjiblog.com/Post/कौन-जिम्मेदार-है-63-निर्दोष-व-मासूम-बच्चों-की-मृत्यु-के-लिए-?

ताजमहल की सुरक्षा में जल्द ही ग्लोबल पोजीशनिंग सिस्टम [जीपीएस] अहम भूमिका निभाएगा।


ताजमहल की सुरक्षा में जल्द ही ग्लोबल पोजीशनिंग सिस्टम [जीपीएस] अहम भूमिका निभाएगा। इससे स्मारक के अंदर होने वाली हर हरकत पर नजर रखी जा सकेगी। ताज की स्थाई
ताजमहल की सुरक्षा में जल्द ही ग्लोबल पोजीशनिंग सिस्टम [जीपीएस] अहम भूमिका निभाएगा। इससे स्मारक के अंदर होने वाली हर हरकत पर नजर रखी जा सकेगी। ताज की स्थाई सुरक्षा समिति की बैठक में यह निर्णय लिया चुका है। अब जिला पुलिस इसका खाका तैयार करने में जुटी है।
सुरक्षा के लिहाज से अति संवेदनशील विश्वदाय स्मारक ताज के अंदर और बाहर सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, परंतु इसके बाद भी और पुख्ता निगरानी की जरूरत समय-समय पर जताई जाती रही है। छह जून को ताज की स्थाई सुरक्षा समिति की बैठक में पुख्ता निगरानी के लिए स्मारक को जीपीएस सिस्टम से जोड़ने का सुझाव दिया गया था। इस पर प्रदेश के एडीएजी सुरक्षा ने भी सहमति जता दी थी। जीपीएस से जुड़ने के बाद पूरे ताज परिसर की आसानी से निगरानी की जा सकेगी। स्मारक के किस हिस्से में कौन क्या कर रहा है? सब नजर आ जाएगा। एसएसपी एससी वाजपेयी ने इसका जिम्मा एसओ पर्यटन थाना सुशांत गौड़ को सौंपा है। गौड़ ने बताया कि ताज परिसर को जीपीएस से जोड़ने के लिए विशेषज्ञों से वार्ता की जा रही है। जल्द ही इसकी रूपरेखा तैयार कर ली जाएगी।
बैठक में ताज की उत्तरी और दक्षिणी मीनार पर भी सीसीटीवी कैमरे लगाने का निर्णय हुआ था, जिससे यमुना पार और संरक्षित स्मारक मेहताब बाग की ओर निगाह रखी जा सके। परंतु एएसआइ से विचार-विमर्श के बाद अब मुख्य मकबरे के दायीं ओर बने मेहमानखाने व बांयी ओर स्थित मस्जिद की बुर्जियों पर कैमरे लगाए गए हैं।
तीसरी आंख भी हुई पुख्ता
स्मारक के अंदर निगरानी को 19 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, परंतु सीआइएसएफ नियंत्रण कक्ष में लगे मॉनीटर्स पर इनकी तस्वीर स्पष्ट नजर नहीं आती थी। बैठक में नये कैमरे और मॉनीटर लगाने का निर्णय हुआ था। अब पुराने कैमरों को हटाकर 19 नये अत्याधुनिक कैमरे लगाए गए हैं, जबकि नियंत्रण कक्ष में भी छह नये एलसीडी मॉनीटर लगाए गए हैं।