रोहिंगिया शरणार्थियों: भारत के लिए एक खतरा

रोहिंग्या मुस्लिमो के जिहादी लिंक अब अच्छी तरह से सबके सामने है अभी – अभी म्यामार में २८ हिन्दुओ की लाशे मिली है और कुछ और लाशो के मिलने की उम्मीद है खोज जारी है| सुप्रीम कोर्ट के सामने याचिका का नतीजा जो भी हो, उसका इस देश से निकलना इस देश के शांति व् गंगा जमुनी तहजीब को बचने के लिए अति अनिवार्य है, अन्यथा पाकिस्तान व् पाकिस्तान-परस्तो की साजिश सफल हो सकती है व् देश की शांति व् सुरक्षा में सेंध लगा सकते है और हो सकता है भारत को भी इराक बना सकते है |
सरकार ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि रोहिंग्या मुसलमान अवैध रूप से अप्रवासी हैं और उन्हें निर्वासित किया जाएगा। केंद्र सरकार ने प्रभावित राज्य सरकारों को उनके निर्वासन के लिए रूपरेखा तैयार करने के निर्देश जारी किए हैं। इस बीच, मामले को दो जगहों पर निर्णय लेने को चुनौती दी गई है, जिसमें शामिल हैं कि अंतर्राष्ट्रीय मानवीय अधिकार सम्मेलनों का उल्लंघन किया गया है, जो दो रोहंग्या आप्रवासियों द्वारा दायर की गई याचिका के आधार पर मामले को सर्वोच्च न्यायालय में खींच लिया गया है। खाशियत यह है की इसमें भी हमारे ही देश के कुछ पाकिस्तान परस्त लोग उनका समर्थन कर रहे है विचारनीय प्रश्न यह भी है के रोहिंग्या मुस्लिमो का केस लड़ने वाले वकीलों (कांग्रेस लीडर कपिल सिब्बल, आप नेता प्रशांत भूषण ) को आखिर फीस कौन दे रहा है आखिर कौन इन रोंहिंग्य मुस्लिमो की मदद कर रहा है आखिर कौन है वो लोग है वो जो रोहिंग्या मुस्लिमो को इस देश में बसा कर शांतिप्रिय देश को इराक जैसा अशांतिमय व् आतंकित बनाना चाहते है |
इस बीच, अलगाववादी मीरवाइज उमर फारूक और कश्मीर में अन्य धार्मिक संगठनों की अध्यक्षता में अलगाववादी द्वारा मुस्लिम (एमएमयू) की कश्मीर में विरोध किया गया, जिन्होंने 8 सितंबर को एकता के रूप में एक संयुक्त बैठक म्यांमार में अपने कथित उत्पीड़न और जातीय सफाई की निंदा करने के लिए रोहिंग्या के साथ देने के लिए| अब तो यह सर्वविदित हो गया है के इन पाक परस्तो अलगाववादी नेताओ की फंडिंग पाकिस्तान द्वारा होती है इसी फंडिंग के कारण ये अलगाववादियो ने आंतकवादियो का भी समर्थन भी करते है |
क्या विरोधाभास है? कश्मीरी मुस्लिम नेतृत्व (मुख्यतः पाकिस्तान प्रायोजित और वित्तपोषित अलगाववादी) एक दूर के देश में विदेशियों की केवल धर्म विशेष के बारे में चिंता व्यक्त कर रहे हैं, लेकिन कश्मीरी पंडितों जो कश्मीरी मूल है जिन्हें उनके ही घर के निकल दिया गया, नवजात बच्चो का बेरहमी से क़त्ल कर दिया गय, अवयस्क लडकियों के साथ बलात्कार किया गय, कितनो को मौत के घाट उतर दिया गया, जो बच गए वो आज भी शरणार्थियो की तरह नरक जैसी जिंदगी जीने को मजबूर है क्या कोई उनके लिए जुलुस धरना आन्दोलन हुआ या अवार्ड वापस हुए| क्या केवल देश को संकट में लाने वाले तत्वों को ही शरणार्थी माना जा सकता है उन्हें ही इस देश में दमाद बनाकर कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, अकबराद्डून ओवैसी, बुधजीवी, अवार्ड वापसी गैंग, Not in my name gang व् अलगाववादी इस देश बसाना चाहते है
रोहिंग्या वैश्विक जिहादी संगठनों के साथ एक कड़ी है। यहां तक कि अलकायदा के संस्थापक ओसामा बिन लादेन ने एक कराची स्थित अखबार, उममत से एक साक्षात्कार में बर्मा का उल्लेख किया था जहां एक मजबूत जिहादी सेना मौजूद थी। यह आश्चर्यजनक नहीं है, इसलिए, कि रोहंग्याओं को कश्मीरी आतंकवादियों का समर्थन है। जकाइर मुसा, अल-कायदा के सहबद्ध, अंसार गजवत-उल-हिंद के आत्म-अभिमानी कमांडर, 10 मिनट के ऑडियो संदेश में, यूट्यूब चैनल अंसार गजवा पर रिहा, ने जम्मू में रोहिंग्या मुसलमानों को त्यागने के खिलाफ सरकार को चेतावनी दी। उन्होंने भारत को "गाय-पूजा", प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और हिंदुओं के शासन से "मुक्त" करने की धमकी दी।
संयोग से, रोइंग्याज बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी बांग्लादेश के एक आतंकवादी दल बांग्लादेश के एक संगठन बांग्लादेश इस्लामिक छात्राशीबीर (आईसीएस) से भी संबद्ध हैं, और हिंसक सड़क प्रदर्शनों को शुरू करने, सुरक्षा बलों पर हमले, धर्मनिरपेक्ष राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों पर हमला करते हैं और मासूमो का क़त्ल करते है |
इसलिए, यह मानना गलत नहीं होगा कि रोहिंग्या जिहादी भी हिंदू भावनाओं को रोकते हैं। भारत में उनके अवैध प्रवास और देश के किसी भी हिस्से में बसने का निर्णय, पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) द्वारा बनाई गई एक कोर समूह द्वारा मास्टरमाइंड किया जा रहा है। आईएसआई का इरादा दो गुना है: पहला, उन क्षेत्रों में कट्टरता फैलाने के लिए जो वे व्यवस्थित करते हैं और उसके बाद, इस क्षेत्र के इस्लामीकरण के लिए उनका इस्तेमाल करते हैं। दूसरा, क्षेत्रीय जनसांख्यिकी को बदलने के लिए हिंदुओं के पलायन को मजबूर करने के लिए राजनैतिक और धार्मिक झगड़े उग्र होने के लिए |
1948 में पेट्रो-इस्लाम (सऊदी, वहाबी, कट्टरपंथी इस्लाम) और बर्मा के राखीन राज्य में अलकायदा, रोहिंग्या के आगमन से पहले, एक इस्लामी राज्य की स्थापना के लिए एक जिहादी आंदोलन शुरू किया था। इससे पहले, 1940 में, उन्होंने प्रस्तावित पूर्वी पाकिस्तान के साथ अपने क्षेत्र के विलय के लिए एक अलगाववादी आंदोलन शुरू किया, जो स्थानीय बौद्ध आबादी के उत्पीड़न के लिए बहुत ज्यादा था। 1948 में, बर्मा की आजादी के समय, उन्होंने भौगोलिक निकटता और धार्मिक संबंधों के कारण पूर्वी पाकिस्तान के साथ पश्चिमी बर्मा क्षेत्र को शामिल करने के लिए मुहम्मद अली जिन्ना से संपर्क किया था।
अंग्रेजों के दबाव होने के डर के कारण जिन्ना ने प्रस्ताव को खारिज कर दिया। कुछ महीने बाद, जमात-ए-इस्लामी का गठन हुआ, जो उत्तर अराकन में एक अलग इस्लामी राष्ट्र के लिए आंदोलन की अगुवाई करता था। आंदोलन को वित्तपोषित और पूर्वी पाकिस्तान आधारित कट्टरपंथी संगठनों द्वारा समर्थित था। उन्होंने स्थानीय शांतिपूर्ण बौद्धों के खिलाफ अत्याचार किया और जलती हुई और लूटपाट का सहारा लिया। बौद्धों को झुकाया जाने की बजाए, प्रतिशोध लेने का निर्णय लिया गया और यह सुनिश्चित किया कि रोहंगिया मुस्लिम इस क्षेत्र की भूगोल को बदलने में असमर्थ हैं। एक अलग राष्ट्र के अपने सपने को महसूस करने में असफल होने के कारण, रोहिंग्या मुसलमानों ने बर्मी नागरिकता की तलाश शुरू कर दी थी। हालांकि, 1962 के बर्मीज़ तख्तापलट की स्थिति के बाद, स्थिति रोह्नगीज मुस्लिमो के लिए खराब हो गई थी।
बाद में, रोहिंग्या को एक गैर-राष्ट्रीय जाति घोषित कर दिया गया और बर्मी नागरिकता से इनकार कर दिया गया। 1992 में उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू हुई, जिसके चलते उन्हें बांग्लादेश और अन्य इस्लामी देशों में भाग लेने का मौका मिला, जो उन्हें भी होस्ट करने के लिए अनिच्छुक थे। बांग्लादेश के कॉक्स बाजार और देश के अन्य हिस्सों के शरणार्थी शिविरों में वे वैश्विक जेहादी संगठनों के लिए तोप-चारा बन गए, सऊदी अरब द्वारा उचित वित्तपोषण के लिए। एक अच्छी तरह से छिपी षड्यंत्र और कुशलतापूर्वक निष्पादित योजना में, वे बांग्लादेश के साथ झरझरा सीमा के माध्यम से अवैध रूप से भारत में भी घुसपैठ कर रहे थे। अवैध रोहिंग्या मुस्लिम प्रवासियों के स्थलों में से एक जम्मू था, एक संवेदनशील हिंदू बहुमत बॉर्डर शहर पहले से ही पीर पंजाल और आईएसआई प्रायोजित जिहादी आतंक के जनसांख्यिकीय आक्रमण का सामना कर रहा है। जम्मू का चयन करने का कारण आईएसआई के पहले के दो गुना मिशन के अनुरूप था।
पाकिस्तान और सऊदी अरब में जिहादी समूह अब्यवस्था फ़ैलाने के लिए रोहिंग्याओं को भर्ती और प्रशिक्षण दे रहे हैं। पेट्रो डॉलर का उपयोग इन आतंकवादी समूहों के वित्तपोषण के लिए किया जाता है। मुख्य रोहंगिया आतंकवादी समूह जो प्रचलित है - हराकत-उल-याकिन, जिसका नेता सऊदी अरब में स्थित हैं, जिनमें से सभी रोहंग्या मूल के हैं वे बांग्लादेश और पाकिस्तान में अच्छी तरह से जुड़े हुए हैं; और पिछले कई वर्षों से बांग्लादेश और उत्तरी राखीन राज्य सक्रिय है |
जिहादियों के बीच एक प्रमुख नाम अटौल्ला (उर्फ अमीर अबू अमर, अबू अमर जूननी) है कराची में जन्मे, वह एक मुस्लिम रोहिंग्या का पुत्र है और मक्का में बड़ा हुआ और सऊदी अरब में मदरसे में शिक्षित, प्रशिक्षित और कट्टरपंथी था। वह 2012 में सऊदी अरब से गायब हो गया और यह पता चला कि वे व्यावहारिक गोरिल्ला युद्ध में प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए पाकिस्तान गया था । वह अराकन रोहिंग्या साल्वेशन आर्मी, म्यांमार की सीमा चौकी पर हमले के लिए जिम्मेदार आतंकवादी संगठन में शामिल होने की खबर है।
कराची में स्थित एक पाकिस्तानी नागरिक, अब्दुस क़ाडोस बर्मी, एक अन्य नाम है। यह भी एक रोहिंग्या मुस्लिम है वह हरकत-उल-जिहाद-अल-इस्लामी अराकान का मुखिया है और लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) जमात-उद-दावा (ज्यूडी) और जैश-ए-मोहम्मद (जेएम) के साथ बहुत करीबी संबंध हैं। ), आईएसआई प्रायोजित जिहादी आतंकवादी संगठन, जो भारत में भी सक्रिय हैं। एलईटी और जेएम के पास अलकायदा के साथ संबंध हैं और वे पाकिस्तान के भीतर आसानी से काम करते हैं, जिसने वैश्विक जिहादी आतंकवाद के केंद्र के रूप में सक्रिय है | इन आतंकवादी संगठनो ने बांग्लादेश और थाईलैंड में शरणार्थी शिविरों में आतंकवादियों को प्रशिक्षण दिया है और म्यांमार में जम्मू में रहने वाले रोहिंग्याओं को प्रशिक्षित करने के लिए उन्हें कश्मीर में घुसपैठ होने की संभावना हो सकती। अक्तूबर 2015 में दक्षिण कश्मीर में मारे गए दो उग्रवादियों में से एक अब्दुर रहमान अल आर्कानी बर्मी भी एक रोहिंगया था।
रोहिंग्या की जिहादी मानसिकता के है, इसलिए, इस तथ्य से इनकार नहीं किया जा रहा है कि भारत में उनकी मौजूदगी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है, इसलिए संवेदनशील जम्मू और कश्मीर क्षेत्र में और उनके शीघ्र निर्वासन राष्ट्रीय हित में है।
कुछ लोग यह तर्क दे सकते हैं कि सभी रोहिंग्या जिहादियों नहीं हैं और निर्दोष को निर्वासित क्यों होना चाहिए। तथ्य यह है कि दोनों के बीच भेद करना असंभव है किसी भी मामले में एक बुरा मछली पूरी तालाब को गन्दा कर सकती है । वे सभी अवैध आप्रवासी हैं उनके जिहादी लिंक अच्छी तरह से स्थापित हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में, रोहिंग्या को जल्दबाजी में वापस भेज दिया जाना चाहिए। जो भी हो, सुप्रीम कोर्ट के सामने याचिका का नतीजा हो सकता है, जम्मू से बाहर निकलना अनिवार्य है। जम्मू रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रूप से महत्वपूर्ण आईएसआई के मंसूबो को रोकने के लिए |
सारे भारतीयों को अब यह सही प्रकार से समझ लेना चाहिए के यदि रोहिंग्या मुस्लिमो को यदि भारत में रहने का मौका दिया गया तो जिस प्रकार म्यामार में लाशो की खेप मिल रही है वो दिन दूर नही जब यहाँ भी इस प्रकार लाशो की खेप मिलेगे, हमारे देश के देशभक्त मुस्लिमो को भी ये अच्छी प्रकार से समझ लेनी चाहिए की वो इस देश को इराक जैसा नरक बना कर रहना चाहते है या जिस प्रकार शांतिपूर्ण तरीके से वो रह रहे है |
हिन्दू की हालत आज भारत में काफी चिंताजनक हो गई है, मौजूदा हालातो में ये कही भी किसी भी प्रकार से नहीं लगता के हिन्दू भारत के मूल निवासी है, अरे जिन हिन्दुओ को अपने त्योहरो को मानाने के लिए सुप्रीम कोर्ट की शरण लेनी पड़ी, कश्मीर जहा के मूल निवासी कश्मीरी हिन्दू एक अरसे से अपने ही घर से निर्वासित शरानार्थियो की तरह देश में इधर उधर नरक जैसी जिंदगी जीने को मजबूर है, जहा प० बंगाल व् कर्णाटक में सैकड़ो हिन्दुओ को मौत के घाट उतरा जाता है, प० बंगाल मयूर गाँव व् अन्य कई स्थानों में में तो पचासों हिन्दू महिलाओ के साथ बलात्कार किया गया कई नवजात बच्चो का बेरहमी से क़त्ल किया गया, यही नहीं उत्तर प्रदेश में शामली में हिन्दू परिवारों का पलायन, हिन्दू अपने ही देश में अपने आराध्य प्रभु श्री राम की मंदिर बनाने के लिए दशको से कोर्ट कचहरी के चक्कर लगा रहे है व् प्रभु श्री राम अपनी जन्मस्थली पर तम्बू में है आदि अनेक तथ्य है ( मुझे मालूम है यदि आप अपने दिमाग पर जोर देगे तो आप को ऐसे कई अन्य तथ्य व् घटनाये मिल जायेगी) जिससे मुझे लगता ही नहीं के हिन्दू भारत के मूल निवासी है|
अब केवल इतना ही कह सकता हु के यदि अब भी हिन्दू यदि जातिगत व् ऊच नीच राजनीती में फंसे रहेग, वसुधैव कुटुम्बकम के विचारो में फंसे रहेगे, अपने इतिहास से नहीं सीखेगे (एक हिन्दू ने विदेशियो पर दया खाकर शरण दी थी फिर आपने मुगलों की शाशनकाल जिसमे मुस्लिम धर्म न अपनाने के कारन आरे से चीरा गया नवजात बच्चो को क़त्ल किया गया, सैकड़ो वीरांगनाओ को अपनी इज्जत बचाने के लिए जौहर करना पड़ा, खुलते तेल में डाला गया, आँखों में सरिया डाला गया) तो वो दिन दूर नहीं जब आप शरणार्थी बनकर इधर उधर जान बचाते फिर रहेगे एक बात कहना चाहुगा के चीन के एक शाशक ने स्पष्ट रूप से कहा था के “शांति बन्दूक की नोक पर होती है”, लक्ष्मन ने भी कहा था “भय बिनु होत न प्रीत”, वैसे भी कायर व् आलसी लोगो का कोई धर्म व् देश नही होता, अकर्मण्य लोगो का कोई अधिकार नही होता| इतिहास गवाह है के जब जब पुरुषार्थ उठ कर अपने अधिकार, धर्म व् देश की रक्षा के लिए कृतसंकल्प के साथ विरोध किया है तभी शांति की स्थापना हुई है आप इराक या अफगानिस्तान या म्यामार को ही ले लीजिये, यदि इराक या अफगानिस्तान की आम जनता खुद अपने अधिकारों व् देश की रक्षा के लिए खुद न खड़े होते तो आज उनकी हालत आज क्या होती इराक में तो आज भी जंग जरी है, म्यामार के बौध जिन्हें चीटी के भी गलती पर मर जाने पर प्रायश्चित करना पड़ता है वो अपने धर्म व् देश के लिए रोहिंग्या आतंकियों के विरोध में खड़े हुए जिसके कारन वहा का शाशन को भी उनका साथ देना पड़ा धीरे धीरे आज वो सफलता के रस्ते पर अग्रसर है|
यहाँ मै एक बात और कहना चाहूँगा के यदि वास्तव में रोहिंग्या मुस्लिमो के साथ अन्याय हो रहा है तो सारे मुस्लिम देशो जैसे सऊदी अरब, पाकिस्तान व् अन्य देशो को शीघ्र ही उन्हें अपने देश में शरण देना चाहिए सबसे पहले पाकिस्तान को किन्तु क्या कारन है के पाकिस्तान रोहिंग्या मुस्लिमो को शरण न देकर भारत में बसना चाहता है म्यामार से जम्मू कश्मीर काफी दूर है जबकि चीन काफी पास है फिर आखिर वो क्या कारन है के रोहिंग्या मुस्लिम जम्मू कश्मीर में तो बसना चाहते है किन्तु सबसे नजदीक चीन में नही, ये भी काफी विचारनीय तथ्य है, इस बारे में आपने कभी सोचा के पाक शरण क्यों नहीं दे रहा और चीन में वो क्यों नहीं बसना चाहते है, सोचिये जनाब, सोचिये
“अब आपको निर्णय करना है आप शरानार्थियो को शरण देकर कुछ समय के अन्तराल के बाद शरणार्थियो वाली जिंदगी जीना चाहते है या इन रोहिंग्या मुस्लिमो को शरण न देकर, इनके पाक परस्त रहनुमाओ के खिलाफ सड़क पर आकर विरोध करके इनको नापाक मंसूबो को नाकाम करके देश की शांति व् सुरक्षा को स्थापित करते हुए सुखमय जीवन जीना चाहते है, निर्णय आपका ही होगा किन्तु आपके निर्णय का असर सारे देश पर होगा, खूब सोच समझ कर निर्णय कीजियेगा व् मुझे भी अवगत करियेगा|”