भगवान राम की आरती करने पर मुस्लिम महिलाएं इस्लाम से खारिज : इस्लाम खतरे में

देवबंद। दिवाली के अवसर पर वाराणसी में कुछ मुस्लिम महिलाओं द्वारा भगवान राम की आरती व दिए जलाने पर देवबंद उलेमा नाराज हो गए हैं। इतना ही नहीं मुस्लिम उलेमाओं ने इन महिलाओं को इस्लाम से भी खारिज कर दिया है। उलेमाओं का कहना है कि महिलाओं के इस कार्य से इस्लाम खतरे में आ गया है किसी और धर्म के देवी-देवताओ की पूजा या इबादत या सम्मान करना इस्लाम के खिलाफ है इस्लाम किसी और धर्म के सम्मान को तरजीह नही देता है अब इन महिलाओ को अल्लाह से माफी मांगकर और कलमा पढ़कर दोबारा से इस्लाम में दाखिल होना पड़ेगा, वर्ना इस्लाम में इनकी कोई जगह नही है|

‘करनी होगी तौबा’


बता दें कि वाराणसी में एक कार्यक्रम के दौरान कुछ मुस्लिम समाज की महिलाओं ने भगवान राम की आरती कर दिए जलाए थे। जिससे नाराज होकर देवबंद के मुस्लिम उलेमाओं ने इन महिलाओं को इस्लाम से खारिज कर दिया है। उलेमाओं का कहना है कि इस्लाम में सिर्फ अल्लाह की पूजा की जा सकती है, किसी और की पूजा करना इस्लाम के खिलाफ है। इसलिए अब इन महिलाओं को तौबा कर कलमा पढ़ना होगा और उसके बाद ही वह इस्लाम में दोबारा दाखिल हो सकती हैं।
बता दें कि इन महिलाओं का नेतृत्व नाजनीन अंसारी कर रही थी, जिनका मानना है कि भगवान राम उनके पूर्वज हैं। हम सभी लोग भारतीय मुस्लिम वस्तुतः हिन्दू ही थे जो मुस्लिम आक्रमंकरियो के डर की वजह से धर्म परिवर्तन करके मुस्लिम बन गए है भले ही उन लोगों ने अपना नाम और धर्म बदल लिया हो, लेकिन वह अपने पूर्वज नहीं बदल सकते।
अब सवाल ये उठता है के वो हमारे धर्म, देवी-देवताओ का सम्मान नही करते, यदि उनके धर्म के किसी व्यक्ति ने हमारे देवी-देवताओ का सम्मान या पूजा करते है तो इस्लाम से निकल दिया जाता है तो फिर हिन्दू इनके मकबरों में जा कर के क्यों सर झुकाते हिया जिसने हिन्दू बहिन बेटी पर अत्याचार किया हो, हजारो हिन्दुओ को सरेआम क़त्ल किया हो उसे हम देवता कैसे मान लेते है? उन बर्बर आंक्रंताओ को हम भगवान् कैसे मान लेते है? उनके मकबरों पर चादर क्यों चडाते है, क्या इसलिए कि उन्होंने हमारे बहिन बेटियो के कपडे उतारकर निर्वस्त्र कर अपने सैनिको के सामने डाल दिया था, या इसलिए कि उसने हमारे धर्मगुरूओ को खौलते तेल में डाल दिया था या इसलिए कि उन्होंने दो नवजात बच्चो को दिवार में चुनवा दिया था, आखिर क्यों हिन्दू इतने सहिष्णु हो जाते है, क्यों इन आंतकवादी रोहिंग्यो को शरण देने को तैयार है जो म्यामार में सैकड़ो हिन्दुओ का क़त्ल कर के आ रहे है, आखिर क्यों हिन्दू इतने उदार हो जाते है के अपने ही दुश्मनों के द्वारा बार-बार धोखा खा लेने के बाद भी उनका समर्थन करते है|
वो कौन सी वजह है जिसके कारण गौमाता का क़त्ल करके खाने वाले को इतनी हिम्मत आ जाती है के गुजरात में हिन्दू मंदिरों में घुस के पूजा कर लेते है और हिन्दू भी उनके साथ खड़े हो जाते | कल तक हिन्दू के टैक्स के पैसे से सब्सिडी लेकर हज होते थे, सैफई में नंगा नाच होता था, मदरसों को पैसा दिया जाता था, आज अयोध्या में प्रभु श्री राम के लिए दीपक जलने पर फिजूलखर्ची बताया जा रहा है, आखिर क्यों हिन्दू खड़ा नही हो रहा है, आखिर क्यों हिन्दू अपनी अस्मिता व् संस्कृति को बचाने के लिए खड़ा नही हो रहा है, "अब भी वक्त है, खड़े हो जाओ वर्ना हिन्दुओ तुम्हारी आने वाली नसले नमाज़ अदा करेगीं, मंदिर का कही नामोनिशान नही रहेगा, वैसे भी तुम्हारे ही देश में तुम्हारे आराध्य श्री राम कई दशको से तम्बू में है, तुममे हिम्मत नही के उनको एक छत दे सको, बस कोर्ट के चक्कर लगा रहे हो, और खुद को दीलाषा देने के लिए नारा लगाते हो के "मंदिर वही बनायेगे" किन्तु आज तक एक ईट भी नही रख सके,"|